Healthy Leafy Vegetables for Anemia: आजकल खून की कमी यानी एनीमिया महिलाओं और बच्चों में एक आम समस्या है. ऐसे में चुकंदर के पत्तों का साग आपके लिए बेहतरीन साबित हो सकता है. इसमें भरपूर आयरन, फोलेट, विटामिन A, C, K और कैल्शियम होता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने और कमजोरी, थकान व चक्कर जैसी समस्याओं में राहत देने में मदद करता है. जानिए इसको बनाने का तरीका और इसके लगातार सेवन से मिलने वाले फायदों के बारे में पूरी जानकारी.
बागेश्वर सहित पहाड़ी इलाकों में खून की कमी यानि एनीमिया एक आम समस्या मानी जाती है, खासकर महिलाओं और बच्चों में. ऐसे में चुकंदर के पत्तों का साग एक प्राकृतिक और सस्ता उपाय बनकर सामने आता है. आमतौर पर लोग चुकंदर का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन उसके पत्तों को बेकार समझकर फेंक देते हैं. जबकि इन्हीं लाल-हरे पत्तों में आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करती है. नियमित रूप से इस साग को खाने से कमजोरी, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में इसे खून बढ़ाने वाला साग कहा जाता है.

बागेश्वर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. संगीता ने बताया कि चुकंदर के पत्ते केवल आयरन ही नहीं, बल्कि कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. इनमें फोलेट, कैल्शियम, विटामिन A, C और K अच्छी मात्रा में पाया जाता है. फोलेट नई लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, वहीं कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है. फाइबर की मौजूदगी पाचन को दुरुस्त रखती है और कब्ज जैसी समस्या से बचाती है. एंटीऑक्सीडेंट शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं. यही वजह है कि आयुर्वेद और लोकचिकित्सा में चुकंदर के पत्तों को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है.

बागेश्वर की कुशल गृहिणी अनीता टम्टा लोकल 18 को बताती है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि नाश्ते में क्या बनाया जाए. चुकंदर के पत्तों की सब्जी इस परेशानी का आसान समाधान है. इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और सामग्री भी घर में आसानी से मिल जाती है. हल्का सा लहसुन, प्याज, नमक और मसालों के साथ यह सब्जी 10–15 मिनट में तैयार हो जाती है. रोटी या पराठे के साथ इसका स्वाद बेहद अच्छा लगता है. खास बात यह है कि यह हल्की होने के कारण सुबह के समय पचने में भी आसान रहती है और दिनभर शरीर में ऊर्जा बनाए रखती है.
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अक्सर सेहतमंद चीजों को लेकर यह धारणा रहती है कि वे स्वाद में अच्छी नहीं होतीं, लेकिन चुकंदर के पत्तों का साग इस सोच को पूरी तरह बदल देता है. हल्की मिठास और मसालों का संतुलन इसे बेहद लजीज बनाता है. पहाड़ी इलाकों में लोग इसे सरसों के तेल में भूनकर बनाते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी निखर जाता है. कई घरों में इसमें हल्का सा भांग या जाख्या भी डाली जाती है. यही देसी तड़का इसे खास बनाता है और बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इसे चाव से खाते हैं.

महंगाई के इस दौर में पौष्टिक भोजन हर किसी के लिए आसान नहीं रह गया है. ऐसे में चुकंदर के पत्तों की सब्जी एक बजट फ्रेंडली विकल्प है. चुकंदर खरीदने पर उसके पत्ते अक्सर मुफ्त या बेहद कम कीमत में मिल जाते हैं. यानी एक ही सब्जी से दो फायदे-जड़ भी और पत्ते भी. ग्रामीण इलाकों में तो लोग इसे अपने खेतों या किचन गार्डन से ही तोड़ लाते हैं. कम खर्च में ज्यादा पोषण मिलने की वजह से यह साग गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है.

बागेश्वर और आसपास के गांवों में चुकंदर के पत्तों का साग लंबे समय से खानपान का हिस्सा रहा है. पहले जब बाजार से सब्जियां आसानी से नहीं मिलती थीं, तब लोग मौसम के हिसाब से उगने वाली हरी सब्जियों पर ही निर्भर रहते थे. चुकंदर के पत्तों को साग, सूप या पराठे की स्टफिंग के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. यह परंपरा आज भी कई घरों में जीवित है. इसी देसी खानपान की वजह से पहले लोगों की सेहत मजबूत रहती थी और खून की कमी जैसी समस्याएं कम देखने को मिलती थीं.

खून की कमी की समस्या सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों में देखी जाती है. ऐसे में चुकंदर के पत्तों का साग इनके लिए खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है. आयरन और फोलेट की मौजूदगी महिलाओं में एनीमिया को कम करने में मदद करती है. बच्चों के लिए यह साग पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ स्वादिष्ट भी होता है, जिससे वे बिना नखरे के इसे खा लेते हैं. गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह साग लाभकारी माना जाता है, हालांकि डॉक्टर की सलाह के साथ इसका सेवन बेहतर रहता है.

आज जब लोग केमिकल युक्त फूड से दूरी बनाकर देसी और प्राकृतिक भोजन की ओर लौट रहे हैं, तब चुकंदर के पत्तों का साग एक देसी सुपरफूड के रूप में पहचान बना सकता है. अगर इसके फायदों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए, तो यह शहरी रसोई में भी जगह बना सकता है. सेहत, स्वाद और सादगी-तीनों का संगम इसे खास बनाता है. नियमित रूप से इसे भोजन में शामिल कर न केवल खून की कमी से बचा जा सकता है, बल्कि रोजाना सब्जी की झंझट से भी राहत पाई जा सकती है.
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