Bathua Health Benefits in Winter: पहाड़ों में सर्दियों के दिनों में जो साग सबसे ज्यादा दिखाई देता है, उनमें बथुआ का नाम जरूर आता है. ठंड के मौसम में यह साग घर-घर में बनता है और लोगों की रोज की थाली का हिस्सा रहता है. आज भले ही शहरों में इसे हेल्दी ग्रीन कहा जाने लगा हो, लेकिन पहाड़ों के लिए बथुआ हमेशा से साधारण, भरोसेमंद और अपनापन लिए हुए साग रहा है.
पहाड़ों की ठंडी हवा, साफ पानी और उपजाऊ मिट्टी में उगने वाले पौधे स्वाद के साथ सेहत भी देते हैं. बथुआ ऐसा ही एक पारंपरिक साग है, जिसे पहाड़ी इलाकों में सर्दियों के मौसम का वरदान माना जाता है. शहरों में यह अब हेल्दी ग्रीन कहलाने लगा है, लेकिन पहाड़ों में बथुआ हमेशा से रोजमर्रा की थाली का हिस्सा रहा है.

बथुआ एक जंगली साग है, जो बिना ज्यादा देखभाल के खेतों, मेड़ों और खुले स्थानों पर उग आता है. इसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है. पहाड़ों में इसे प्राकृतिक रूप से उगने वाला शुद्ध और ताजा साग माना जाता है. इसका स्वाद हल्का कसैला होता है, लेकिन पकने के बाद बेहद स्वादिष्ट बन जाता है.

पहाड़ी जीवन में ठंड, मेहनत और सीमित संसाधनों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में बथुआ जैसे साग स्थानीय लोगों के लिए सस्ता और भरोसेमंद पोषण रहे हैं. सर्दियों में जब शरीर को ज्यादा ऊर्जा और गर्माहट की जरूरत होती है, तब बथुआ का सेवन खास माना जाता है. पहाड़ों में इसे रोटी, मक्के की रोटी या चावल के साथ खाया जाता है.
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आयुर्वेद में बथुआ को त्रिदोष नाशक माना गया है. यह खासकर वात और कफ को संतुलित करता है. सर्द पहाड़ी मौसम में वात दोष बढ़ने की संभावना रहती है, ऐसे में बथुआ शरीर को संतुलन देता है. आयुर्वेद के अनुसार यह पाचन को बेहतर करता है और शरीर से गंदे तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है.

बथुआ पोषण से भरपूर साग है. इसमें आयरन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन A, C, K, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में जहां दूध, दही और फल सीमित मात्रा में मिलते हैं, वहां बथुआ जैसे साग पोषण की कमी को पूरा करते हैं.

बथुआ में मौजूद फाइबर कब्ज, गैस और अपच की समस्या को दूर करता है. भारी भोजन के बाद पहाड़ों में बथुआ का साग पाचन के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर में अंदरूनी गर्माहट बनाए रखता है, जो ठंडे मौसम में जरूरी होती है. इसमें मौजूद आयरन एनीमिया में लाभ देता है, खासकर पहाड़ी महिलाओं के लिए यह बहुत उपयोगी है. कैल्शियम और विटामिन K हड्डियों को मजबूत बनाते हैं, जो रोज मेहनत करने वालों के लिए जरूरी है.

आज जब लोग फिर से नेचुरल और ऑर्गेनिक भोजन की ओर लौट रहे हैं, तब बथुआ दोबारा चर्चा में है. जो साग पहाड़ों में पीढ़ियों से खाया जा रहा था, वही अब शहरों में सुपरफूड कहलाने लगा है. लेकिन पहाड़ी लोगों के लिए बथुआ सिर्फ सेहत नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है.
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