भारतीय अंडर 17 महिला फुटबॉल टीम में चयन
महज 14 वर्ष की उम्र में अनुष्का कुमारी का चयन भारतीय अंडर 17 महिला फुटबॉल टीम में होना, झारखंड के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है. वह अभी
भारतीय अंडर 17 महिला फुटबॉल टीम का हिस्सा हैं. रांची जिले के ओरमांझी गांव की रहने वाली अनुष्का आज न केवल अपने गांव और जिले, बल्कि पूरे राज्य की पहचान बन चुकी हैं.
अंडर 17 फुटबॉल का टॉप स्कोरर रही हैं अनुष्का
राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान को लेकर अनुष्का गर्व और संतोष महसूस कर रही हैं. उनका कहना है कि यह पुरस्कार उसे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा. इस साल अनुष्का ने फुटबॉल की दुनिया में अपना विशेष लोहा मनवाया है. अंडर 17 भारतीय टीम की बात टॉप स्कोरर भी रही हैं. लोग उसे गोल मशीन के नाम से भी जानते हैं.
पिता हैं चोट से पीड़ित, मां है दिहाड़ी मजदूर
वहीं, अनुष्का की सफलता के पीछे संघर्षों की लंबी कहानी छिपी है. अनुष्का ने बताया कि उसकी मां रीता मुंडा दिहाड़ी मजदूर हैं और रोज मजदूरी कर पूरे परिवार का पालन पोषण करती हैं. पिता दिनेश मुंडा भी मजदूरी करते थे, लेकिन 3 वर्ष पहले काम के दौरान एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए. दुर्घटना के बाद उनके पैरों में इतनी परेशानी हो गई कि उनका उठना बैठना तक मुश्किल हो गया है. तब से वे घर पर ही रहने को मजबूर हैं. ऐसी विषम परिस्थितियों में मां ही परिवार की एकमात्र कमाऊ सदस्य हैं. आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया है.
डेली 7 घंटे अनुष्का करती हैं अभ्यास
‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है’, यह पंक्ति अनुष्का कुमारी के जीवन पर पूरी तरह चरितार्थ होती है. वह हजारीबाग के आवासीय बालिका खेल छात्रावास में रहकर रोजाना 7 घंटे से अधिक समय तक फुटबॉल के मैदान में पसीना बहाती हैं. अनुशासन, निरंतर अभ्यास और खेल के प्रति जुनून ने ही अनुष्का को इस मुकाम तक पहुंचाया है.
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से हुए सम्मानित
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद अनुष्का को हर ओर से बधाइयां और सम्मान मिल रहे हैं. हजारीबाग के उपायुक्त, जिला खेल पदाधिकारी, उसके कोच और खेल विभाग से जुड़े अधिकारियों ने उसका उत्साहवर्धन किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं. अनुष्का की यह उपलब्धि न सिर्फ झारखंड, बल्कि देश की उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन हालात में भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखती है.
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