हजारीबाग के किसान राजेंद्र टुडू ने ग्राफ्टिंग (कलमी) तकनीक से खेती में क्रांति ला दी है. वे टमाटर के तने को जंगली बैंगन की जड़ के साथ जोड़कर रोग-मुक्त और मजबूत पौधे तैयार कर रहे हैं. इस वैज्ञानिक विधि से न केवल पैदावार बढ़ी है, बल्कि वे सालाना 6 लाख रुपये तक की शानदार कमाई भी कर रहे हैं.
ऐसे ही जिले के चुरचू प्रखंड के एक किसान ने ठानी कि वह अपने गांव और आसपास के किसानों के लिए स्थायी समाधान लाएंगे. प्रखंड क्षेत्र के किसान राजेंद्र टुडू आज एक बदलाव की किरण के रूप में उभरे हैं. उन्होंने सब्जियों के कलमी बीज तैयार करके कई तरह के रोगों से फसलों को बचाया है. उन्होंने बताया कि पारंपरिक बीजों और पौधों से फसलें अक्सर रोगग्रस्त हो जाती हैं और पैदावार कम होती है. इस चुनौती को दूर करने के लिए उन्होंने कलमी तकनीक सीखने का निर्णय लिया.
पौध तैयार करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया
राजेंद्र टुडू आगे बताते है कि इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञों से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया. इस प्रशिक्षण में उन्होंने बीज और पौध तैयार करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया सीखी. ट्रेनिंग में दौरान उन्होंने पौधों के रोग-प्रतिरोध और सही देखभाल की तकनीक समझने में मददगार साबित हुआ. इसके साथ ही उन्होंने सबसे पहले अपनी खेती के लिए कलमी पौधे तैयार करने लगे. जिसके बाद इसका व्यायसायिक स्तर पर इसे तैयार करने लगे.
उन्होंने आगे बताया कि कलमी पौधे तैयार करने के में दो पौधों को जोड़कर एक मजबूत पौधा तैयार किया जाता है, जिसे ग्राफ्टिंग तकनीक कहते हैं. उदाहरण के लिए, टमाटर की खेती के लिए टमाटर के तने को जंगली बैंगन की जड़ों से जोड़ा जाता है. सबसे पहले स्वस्थ टमाटर की कलम (छोटा तना) काटी जाती है और जंगली बैंगन के मजबूत जड़ वाले पौधे के तने पर सावधानी से जोड़ा जाता है. सही समय, तापमान और तकनीक से यह दोनों हिस्से आपस में जुड़ जाते हैं और नया पौधा तैयार होता है. यह पौधा न केवल उच्च पैदावार देता है बल्कि बारिश, ठंड और अन्य मौसमीय प्रभावों के प्रति अधिक सहनशील होता है.
सालाना 6 लाख कमाई
राजेंद्र टुडू न केवल कलमी पौध तैयार करते हैं, बल्कि इसे सस्ते दाम पर किसानों तक पहुंचाते हैं. उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि किसान पौध की रोपाई और देखभाल की सही जानकारी लें, ताकि फसल अधिक मजबूत और लाभकारी हो. वह अभी 2 एकड़ की भूमि पर नर्सरी का व्यवसाय कर रह रहे है. और इसके जरिए सालाना 6 लाख तक की कमाई भी कर रहे है. उनके प्रयासों से अब इलाक़े के किसान रोग-मुक्त और अधिक पैदावार वाले पौधों के उपयोग से खेती कर रहे हैं, और आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
राजेंद्र टुडू की पहल ने उनके लिए खेती को आसान और भरोसेमंद बना दिया है. पहले जहां बारिश, रोग या कीट के कारण फसल बर्बाद हो जाती थी, अब नए पौधों के माध्यम से पैदावार बढ़ रही है और नुकसान कम हो रहा है. यह तकनीक न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि हजारीबाग के कृषि क्षेत्र को आधुनिक और वैज्ञानिक दिशा भी दे रही है.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.