हरियाणा के बहुचर्चित मनोज-बबली हत्याकांड में आरोपियों तक लोकेशन पहुंचाने वाले पुलिसकर्मी की बर्खास्तगी पर कोर्ट ने रोक लगाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह पुलिस सेवा नियम के विरूद्ध आचरण रहा है। जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने कॉन्स्टेबल जय इंदर की याचिका खारिज करते हुए कहा कि विभागीय जांच और सजा में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या अनियमितता नहीं पाई गई, इसलिए अदालत के हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता मनोज और बबली की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार पुलिस दल का हिस्सा था और उसे दंपती की लोकेशन की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद उसने यह जानकारी दोषी गुरदेव सिंह तक पहुंचाई, जिसने बाद में दंपती की हत्या कर दी। हरियाणा के कैथल जिले के कोरोरा गांव निवासी मनोज-बबली को 15 जून, 2007 को चलती बस से उतारा गया। उसके बाद दोनों की बड़ी निर्ममता से हत्या की गई। फिर हाथ-पैर बांध शव को बोरे में भरा और नहर में फेंक दिया। 9 दिन बाद मिले शव की पहचान लड़की की पायल और लड़के की शर्ट से हुई। दोनों का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने अपने ही गोत्र में अपनी पसंद का हमसफर चुना था। हत्याकांड के एक साल बाद कांस्टेबल बर्खास्त विभागीय जांच के बाद कॉन्स्टेबल जय इंदर को दोषी पाते हुए 29 अप्रैल 2008 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में अपील में पुलिस महानिरीक्षक ने उसे बहाल कर दिया था, लेकिन पुलिस महानिदेशक ने असहमति नोट जारी करते हुए 11 अगस्त 2009 को बर्खास्तगी का आदेश पुनः लागू कर दिया। इसके बाद गृह विभाग ने भी दो जुलाई 2013 को उसकी अपील खारिज कर दी थी।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.