हरियाणा को केंद्र सरकार से बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने सूबे का झारखंड कल्याणपुर-बदलापारा कोल ब्लॉक का आवंटन रद्द कर दिया है। केंद्रीय मंत्रालय के द्वारा इसको लेकर सरकार को नोटिस जारी किया था। इस आवंटन रद्द करने की 3 वजहें बताई जा रही
काफी काम हो चुका है, इस काम में करीब 2.5 करोड़ रुपए भी खर्च किए जा चुके हैं। कोल ब्लॉक के डिमार्केशन के साथ ही फैंसिंग का भी काम पूरा हो चुका है। ऐसे में कोल ब्लॉक के आवंटन रद्द होने से हरियाणा को काफी दिक्कतें आ जाएंगी। ऐसे में सरकार की ओर से आग्रह किया गया है कि ये आवंटन रद्द न किए जाए। सूत्रों की मानें तो आने वाले समय में हरियाणा के सामने इस फैसले से बिजली संकट गहरा सकता है।
आवंटन रद्द होने की ये रहीं 3 वजहें…
सर्वे एजेंसी देरी से फाइनल हुई: दरअसल, केंद्रीय कोयला मंत्रालय की ओर से एक विशेष सर्वे एजेंसी के द्वारा ही ब्लॉक का सर्वे काम किया जाता है। इस सर्वे एजेंसी के आवंटन में भी देरी की गई, जिसके कारण हरियाणा सरकार को प्रोसेस शुरू करने में देरी हुई।
हरियाणा के पत्राचार का नहीं मिल जवाब: जब सर्वे एजेंसी आवंटित हो गई तो हरियाणा सरकार की ओर से कोल ब्लॉक को लेकर काफी पत्राचार किया गया, लेकिन एजेंसी के द्वारा कोई भी सही या समय पर जवाब नहीं दिया गया। इसके कारण भी कई सालों तक सरकार इस मामले में आगे की कार्रवाई नहीं कर पाई।
जहां आवंटन वह नक्सल प्रभावित एरिया: सूत्रों की मानें तो जहां हरियाणा सरकार को झारखंड में कोल का आवंटन किया गया था, वह एरिया नक्सल प्रभावित एरिया था। इस कारण सर्वे एजेंसी के साथ ही सरकार को भी काम शुरू करने में काफी दिक्कतें आईं।
यहां पढ़िए कोल ब्लॉक के बारे में अब तक क्या…
कल्याणपुर-बदलापारा कोल ब्लॉक झारखंड में है। हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) द्वारा इसको डेवलप किया जा रहा था। इसका उद्देश्य हरियाणा के बिजली संयंत्रों के लिए कोयला सुरक्षित करना है; इस ब्लॉक के लिए माइन डेवलपर और ऑपरेटर (MDO) चुनने की प्रक्रिया भी चल रही थी, जिसमें बोली लगाने के बाद कुछ कानूनी अड़चनें भी आई थी। हालांकि हरियाणा इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास करता रहा, इस पूरे प्रोसेस में करीब 18 साल का समय लग गया।
हरियाणा सरकार को अपनी कोयला खदान दिलाने की प्रक्रिया 2024 में तेज हुई, जब कल्याणपुर-बदलापारा कोल ब्लॉक के लिए टेंडर निकला और बोली प्रक्रिया शुरू हुई, जो 8 साल की देरी के बाद आगे बढ़ पाई
यहां पढ़िए कोल ब्लॉक के बारे में…
हरियाणा सरकार को आवंटित यह कोल ब्लॉक झारखंड में है। इस कोल ब्लॉक से लगभग 102.35 मिलियन टन कोयला भंडार का अनुमान है। इस ब्लॉक में अनुमानित खनन लागत लगभग ₹1,501 प्रति टन है, और 33 साल की अवधि के लिए कुल अनुमानित संविदा मूल्य लगभग ₹15,364 करोड़ है।
हरियाणा के लिए क्या होगी दिक्कत
यमुनानगर थर्मल प्लांट (दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट) हरियाणा का एक महत्वपूर्ण कोयला-आधारित बिजली संयंत्र है, जिसकी मौजूदा क्षमता 600 मेगावाट है और हाल ही में एक 800 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट का शिलान्यास खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। ये प्लांट के लिए सरकार इस कोल ब्लॉक को तैयार कर रही थी। इस प्लांट को बनने में करीब तीन साल का समय लगेगा। सूत्रों की मानें तो ब्लॉक को डेवलप करने में भी करीब सरकार को तीन साल का ही समय लगा, ऐसे में सरकार को आवंटन रद्द करने से दिक्कतें आ सकती हैं।
क्या बोले मंत्री जी
ऊर्जा मंत्री अनिल विज कहा कि केंद्रीय मंत्रालय से नोटिस आया था, जिसका जवाब दे दिया गया है। केंद्रीय मंत्रालय से सरकार की ओर से अनुरोध किया गया है सरकार इसको डेवलप कर रही है, इस पर करबी ढाई करोड़ रुपए खर्च किया जा चुका है। इसका आवंटन रद्द न किया जाए।
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