Hanumangarh News : नोहर में मांगीलाल सैनी के निधन के बाद दोस्तों ने शमशान घाट पर ताश खेलकर अनोखी श्रद्धांजलि दी. ताश के शौक और दोस्ती की मिसाल गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है. बताया जा रहा है कि मांगीलाल सैनी को ताश खेलने का बहुत शौक था. उम्र 97 साल की थी, लेकिन रोज दोस्तों के साथ बैठकर ताश खेलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. कल भी वे अपने साथियों के साथ ताश खेल रहे थे.
बताया जा रहा है कि मांगीलाल सैनी को ताश खेलने का बहुत शौक था. उम्र 97 साल की थी, लेकिन रोज दोस्तों के साथ बैठकर ताश खेलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. कल भी वे अपने साथियों के साथ ताश खेल रहे थे. इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उनका निधन हो गया. साथ बैठे लोगों के लिए यह पल किसी झटके से कम नहीं था.
अंतिम संस्कार के बाद दोस्तों ने निभाई दोस्ती
अंतिम संस्कार के बाद जब सब लोग शमशान घाट पर ही बैठे थे, तब उनके साथियों ने फैसला किया कि मांगीलाल को उसी अंदाज में याद किया जाए, जैसा उन्हें पसंद था. फिर वहीं शमशान घाट में ताश की गड्डी खोली गई. कुछ देर के लिए सबने बाजी लगाई. कोई शोर नहीं, कोई हंसी मजाक नहीं, बस चुपचाप पत्ते चलते रहे. साथियों का कहना था कि यह खेल नहीं, अपने दोस्त को आखिरी सलाम था.
गांव में चर्चा का विषय
नोहर इलाके में यह अनोखी श्रद्धांजलि चर्चा का विषय बनी हुई है. कुछ लोग इसे भावनात्मक जुड़ाव बता रहे हैं, तो कुछ इसे दोस्ती की मिसाल कह रहे हैं. परिजनों ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई. उनका कहना है कि मांगीलाल सैनी को ताश से बहुत लगाव था. अगर उनके दोस्त ताश खेलकर उन्हें याद कर रहे हैं तो इसमें बुरा क्या है.
97 साल की लंबी उम्र जीने वाले मांगीलाल सैनी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका ताश का शौक और दोस्तों का साथ उन्हें यादगार बना गया. नोहर की इस घटना ने दिखा दिया कि कभी-कभी विदाई भी अपने अंदाज में दी जाती है. और दोस्ती अगर सच्ची हो तो शमशान घाट तक साथ निभाती है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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