विदेश जाने के लिए एक नाबालिग ने खुद को वयस्क दिखाने के लिए पासपोर्ट आवेदन में ही जन्मतिथि गलत दर्ज कर दी। जब दस्तावेज सत्यापन हुआ तो मामला पकड़ में आ गया। जांच में वास्तविक उम्र 16 वर्ष सामने आने के बाद पासपोर्ट कार्यालय ने आवेदन खारिज करते हुए आवेदक
जानकारी के अनुसार, पासपोर्ट आवेदन की प्रारंभिक जांच के दौरान अधिकारियों को उम्र को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद स्कूल से जुड़े दस्तावेज मांगे गए। रिकॉर्ड मिलान में साफ हुआ कि आवेदन में दर्ज जन्म वर्ष बदला गया था। ताकि, आवेदक वयस्क प्रतीत हो। नाबालिग होने की पुष्टि होते ही पासपोर्ट अदालत ने तत्काल आवेदन निरस्त कर दिया।
पुलिस कार्रवाई से बचने की गुहार पासपोर्ट ऑफिस के अनुसार, किशोरी ने मामले में पुलिस को सूचना न देने का आग्रह किया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उसे भविष्य के लिए सचेत किया गया। साथ ही निर्देश दिए गए कि स्कूल मार्कशीट के अनुसार आधार कार्ड में जन्म तिथि का सुधार कराया जाए। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिग आवेदकों के मामले में माता-पिता की उपस्थिति और आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य होते हैं। चेतावनी के बाद किशोरी ने गलती स्वीकार की, जिसके बाद फाइल क्लोज कर दी गई।
कोर्ट केस छिपाया, फिर लानी पड़ी एनओसी इसी सुनवाई के दौरान एक अन्य आवेदक का मामला भी सामने आया। जिसने पासपोर्ट आवेदन में अपने खिलाफ अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं दी थी। पुलिस वेरिफिकेशन में तथ्य उजागर होने पर आवेदन पर एडवर्स रिपोर्ट लगी और नोटिस जारी किया गया। नोटिस के जवाब में आवेदक ने कोर्ट से एनओसी प्राप्त कर पेश की, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
गलत जानकारी पर सीधी कार्रवाई क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भोपाल के अधिकारियों का कहना है कि आवेदन में गलत तथ्य, अधूरे दस्तावेज या जानकारी छिपाने पर पासपोर्ट आवेदन सीधे खारिज किया जा सकता है। ऐसे मामलों का असर भविष्य में पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
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