यदि आपके पास सिर्फ 2 से 4 हजार रुपये की मामूली पूंजी है और आप कम लागत में कोई ऐसा काम शुरू करना चाहते हैं, जिससे अच्छी कमाई हो सके, तो यह खबर आपके लिए बेहद खास है. गुमला जैसे जिले में सीमित रोजगार के अवसरों को देखते हुए छोटा लेकिन अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बना जा सकता है.
फास्ट फूड बिजनेस सबसे बेहतर विकल्प
आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) के निदेशक एवं एक्सपर्ट निपुण गुप्ता ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि आज भी बड़ी संख्या में लोग बेरोजगारी की शिकायत करते हैं और कहते हैं कि वे अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पूंजी की कमी आड़े आती है. ऐसे लोगों के लिए फास्ट फूड व्यवसाय सबसे बेहतर विकल्प साबित हो सकता है.
उन्होंने बताया कि फास्ट फूड ऐसा क्षेत्र है, जिसे बेहद कम निवेश में शुरू किया जा सकता है और जिसकी मांग हर समय बनी रहती है. महज 2 से 4 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से चाट, फूचका, मोमो, बर्गर, डोसा, इडली जैसे फास्ट फूड आइटम का स्टॉल लगाया जा सकता है. शुरुआत छोटे स्तर से कर धीरे-धीरे इस व्यवसाय को बढ़ाया जा सकता है.
अच्छा स्वाद और गुणवत्ता दिलाएगी ज्यादा मुनाफा
निपुण गुप्ता ने कहा कि आज बाजार में कई फास्ट फूड स्टॉल नजर आते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं, जहां हमेशा ग्राहकों की भीड़ रहती है. इसके पीछे तीन मुख्य कारण होते हैं, खाने की गुणवत्ता, स्वाद और उचित कीमत. यदि इन तीनों बातों का ध्यान रखा जाए, तो ग्राहक खुद-ब-खुद जुड़ते चले जाते हैं.
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति फास्ट फूड बनाने का सही प्रशिक्षण ले लेता है, तो वह बेहतर गुणवत्ता और स्वाद वाले आइटम तैयार कर सकता है, जिससे मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है. इस व्यवसाय में जितना बेहतर स्वाद होगा, उतने ज्यादा ऑर्डर मिलेंगे और कमाई भी उसी अनुपात में बढ़ेगी.
सोशल मीडिया से करें प्रमोशन
एक्सपर्ट के अनुसार, आज के समय में सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल भी इस व्यवसाय को तेजी से आगे बढ़ा सकता है. फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर अपने स्टॉल और खाने के आइटम का प्रचार कर अधिक ग्राहकों तक पहुंचा जा सकता है. इससे ऑर्डर बढ़ते हैं और आमदनी में भी इजाफा होता है.
निशुल्क प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध
उन्होंने यह भी बताया कि इच्छुक लोग बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सिलम में निशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं. यह संस्था भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रायोजित है. यहां पूरे वर्ष में करीब 64 तरह के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं, जिससे लोग स्वरोजगार के लिए तैयार हो सकें और आत्मनिर्भर बन सकें.
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