– अदालत ने कहा अपराध गंभीर, जमानत देने का कोई आधार नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की भूमि को धोखाधड़ी व फर्जी दस्तावेज के माध्यम से बेचने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी लोकेंद्र सिंह भाटी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। आरोपी पर ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की 500 करोड़ रुपये की 51 हजार वर्ग मीटर जमीन को बेचने का आरोप लगा था।
गांव बिसरख जलालपुर में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण के मामले ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की ओर से पिछले साल बिसरख कोतवाली में केस दर्ज कराया गया था। प्राधिकरण की ओर से दी शिकायत में बताया गया था कि कुछ व्यक्तियों द्वारा बिना अनुमति के अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कर हाईकोर्ट के आदेशों की निरंतर अवहेलना की जा रही है। प्राधिकरण की टीम ने कई बार मौके पर पहुंचकर निर्माण रुकवाने का प्रयास किय था। लेकिन निर्माणकर्ता देर-सवेर और विशेषकर रात्रि के समय काम जारी रखते थे। जिन व्यक्तियों को अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के लिए जिम्मेदार बताया है, उनमें सोहरखा के देवेंद्र यादव, बिसरख के कुलदीप, जलालपुर गांव के भारत, महकार, अभिषेक, नैनीताल निवासी गिरीश चन्द्र पढ़लनी, सेक्टर-24 नोएडा निवासी पिकी पढ़लनी व एडब्ल्यूएचओ. गुरजिंदर बिहार निवासी प्रिंस शर्मा का नाम सामने आया है। बाद में जांच में लोकेंद्र सिंह भाटी का भी नाम सामने आया था। प्राधिकरण ने इन सभी पर आरोप लगाया है कि वह सरकारी भूमि पर कब्जा कर अवैध बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर रहे हैं। प्लॉट काटकर बेच रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं।
मामले में आरोपी लोकेंद्र को गिरफ्तार किया गया था। जमानत प्रार्थना पत्र में आरोपी की ओर से कहा गया था कि वह निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए। अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद केस डायरी और उपलब्ध तथ्यों को देखा। ऐसे में जमानत देने के लिए कोई उचित आधार नहीं पाया गया।
एसआईटी का गठन कर जांच करने की मांगः बिसरख में अधिग्रहीत जमीन को बेच हुए हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के प्रकरण में समाजवादी पार्टी के अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव श्याम सिंह भाटी ने घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर गहनता से जांच करने की मांग की। उन्होंने घोटाले में शामिल सभी आरोपियों और सहयोग करने वाले सत्ताधारी नेताओं और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।
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