पलामू जिले के के कृषि विशेषज्ञ डॉ० अखिलेश शाह ने बताया कि भिंडी उगाने के लिए बहुत बड़ी जगह की जरूरत नहीं होती. छत, बालकनी या आंगन में रखा 12–15 इंच गहरा और चौड़ा गमला पर्याप्त होता है. गमले के नीचे पानी निकास के लिए छेद होना जरूरी है.
आज के समय में केमिकल युक्त सब्ज़ियों से सेहत को नुकसान हो रहा है. ऐसे में घर पर उगाई गई भिंडी न केवल सुरक्षित होती है, बल्कि ताज़गी और स्वाद में भी बेहतरीन होती है. थोड़ी सी मेहनत से आप पूरे परिवार के लिए हेल्दी सब्ज़ी उगा सकते हैं.

पलामू जिले के के कृषि विशेषज्ञ डॉ० अखिलेश शाह ने बताया कि भिंडी उगाने के लिए बहुत बड़ी जगह की जरूरत नहीं होती. छत, बालकनी या आंगन में रखा 12–15 इंच गहरा और चौड़ा गमला पर्याप्त होता है. गमले के नीचे पानी निकास के लिए छेद होना जरूरी है.

भिंडी के लिए हल्की, भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी रहती है. सामान्य मिट्टी में वर्मी कंपोस्ट या अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाएं. इससे पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता है और केमिकल खाद की जरूरत नहीं पड़ती.
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भिंडी के बीज बोने से पहले 6 से 12 घंटे पानी में भिगो दें, इससे अंकुरण अच्छा होता है. बीजों को 1–2 इंच गहराई में बोएं और हर बीज के बीच 3–4 इंच की दूरी रखें.

भिंडी के पौधों को रोज़ाना 6–8 घंटे हल्की धूप की जरूरत होती है. मिट्टी को हमेशा हल्का नम रखें, लेकिन ध्यान रखें कि गमले में पानी जमा न हो, वरना जड़ें खराब हो सकती हैं.

समय-समय पर सूखी पत्तियां हटाते रहें और सप्ताह में एक बार जैविक खाद डाल सकते हैं. कीटों से बचाव के लिए नीम का घोल या घरेलू जैविक उपाय अपनाएं.

बीज बोने के लगभग 40–50 दिनों में पौधों पर फूल और भिंडी आने लगती है. भिंडी को समय पर तोड़ते रहें, इससे पौधा अधिक फल देता है और उत्पादन बढ़ता है.

घर पर भिंडी उगाने से न केवल बाजार की महंगी सब्ज़ियों से राहत मिलती है, बल्कि परिवार को ताज़ी, पौष्टिक और केमिकल-फ्री सब्ज़ी भी मिलती है. यह तरीका सेहत और बचत—दोनों के लिए फायदेमंद है.
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