नागझरी निवासी किसान संजय चौकसे ने भी बजट को किसानों के अनुकूल नहीं माना। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में किसान हितैषी होती, तो खाद-बीज और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बढ़ाने जैसे निर्णय लिए जाते। बसाली के किसान बद्री के अनुसार सरकार ने बजट में घोषणाएं तो बड़ी-बड़ी की हैं लेकिन इसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचेगा या नहीं, इस पर संदेह बना हुआ है।
ये भी पढ़ें: MP Budget 2026: मप्र में एक साल में आकार लेंगे 48 इंडस्ट्रियल पार्क, उद्योग-रोजगार को लेकर मोहन सरकार का एलान
हालांकि कुछ किसानों की राय संतुलित भी रही। पांगरी निवासी किसान नंदू पटेल ने कहा कि बजट पूरी तरह खराब नहीं है लेकिन जिन किसानों की जमीन विभिन्न परियोजनाओं में चली गई है, उनके पुनर्वास और मुआवजे पर विशेष प्रावधान होना चाहिए था।
कुल मिलाकर गांवों में बजट को लेकर असंतोष ज्यादा दिखाई दे रहा है। किसान मानते हैं कि बढ़ती लागत, घटती आमदनी और बाजार की अनिश्चितता के दौर में उन्हें ठोस आर्थिक राहत की जरूरत थी। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बजट की घोषणाएं खेत तक पहुंचेंगी या फिर यह भी कागजों तक सीमित रह जाएंगी? आने वाला समय तय करेगा कि यह बजट किसानों के लिए संबल बनेगा या सिर्फ सियासी दस्तावेज साबित होगा।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.