कटहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कच्चे फल की सब्जी और पके फल की बाजार में लगातार मांग रहती है. यही वजह है कि एक ही फसल से किसानों को सालभर आमदनी का मौका मिल रहा है. इस समय कटहल के पेड़ों की डालियों में फल विकसित हो रहे हैं, जो आने वाले दिनों में बेहतर उत्पादन की ओर इशारा कर रहे हैं. कैसे होती है कटहल की खेती, क्या है यह देशी मॉडल और किस तरह किसान कम लागत में ज्यादा लाभ कमा सकते हैं, देखिए ये रिपोर्ट.
सब्जी और फल दोनों रूपों में उपयोगी
कृषि विशेषज्ञ संजय यादव ने लोकल 18 को बताया कि कटहल की खेती का उपयोग दो रूपों में किया जाता है, कच्चा कटहल सब्जी के रूप में और पकने के बाद फल के तौर पर. हरे कटहल की बाजार में सब्जी के रूप में अच्छी मांग रहती है, जबकि पके फल का स्वाद और पोषण मूल्य दोनों ही अधिक होते हैं.
खेती से पहले सही जगह और मिट्टी का चयन जरूरी
कटहल की सफल खेती के लिए ऐसी जगह का चयन जरूरी है, जहाँ पानी का ठहराव न हो और जल निकास की व्यवस्था अच्छी हो. दोमट मिट्टी को सबसे उपयुक्त माना जाता है. साथ ही खेत की मिट्टी की पीएच जांच जरूरी है. यदि पीएच मान 5.5 से 7 के बीच हो, तो पौधों की बढ़वार बेहतर होती है.
ग्राफ्टेड और बीजू—दो तरह के पौधे
कटहल के पौधे दो प्रकार से तैयार किए जाते हैं—ग्राफ्टेड और बीजू. ग्राफ्टेड पौधे अपेक्षाकृत छोटे आकार के होते हैं, इसलिए इनके बीच दूरी कम रखी जाती है. वहीं बीजू पौधे बड़े आकार के होते हैं, इसलिए इनके लिए अधिक दूरी जरूरी होती है. ग्राफ्टेड पौधे: 8 से 10 मीटर की दूरी,बीजू पौधे: 10 से 12 मीटर की दूरीग्राफ्टेड पौधे कम से कम 1 से 2 वर्ष पुराने होने चाहिए.
गड्ढे की तैयारी और खाद प्रबंधन
पौधरोपण से पहले 1×1×1 मीटर का गड्ढा तैयार कर उसे 10 से 15 दिन तक खुला छोड़ देना चाहिए. इसके बाद प्रति गड्ढा 20 से 25 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद, लगभग आधा किलो सिंगल सुपर फास्फेट और उपलब्ध होने पर आधा किलो नीम या सरसों की खली मिलानी चाहिए. इससे पौधों की शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है.
रोपाई का सही समय और देखभाल
कटहल की रोपाई के लिए जून–जुलाई का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, लेकिन फरवरी में भी इसे किया जा सकता है, रोपाई के बाद समय-समय पर निराई-गुड़ाई जरूरी है, ताकि खरपतवार न पनपें और पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता रहे.
कितने साल में मिलता है फल
ग्राफ्टेड कटहल के पौधों में 5 से 6 वर्ष में फल आना शुरू हो जाता है, जबकि बीजू पौधों में फल आने में 7 से 8 वर्ष लगते हैं. सब्जी के लिए हरा कटहल तब उपयुक्त माना जाता है, जब उसका वजन लगभग 1 किलो या उससे अधिक हो. पके फल के लिए कटहल का रंग पीला और फल पूरी तरह पका होना चाहिए.
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