Green coriander farming : कृषि विज्ञान केंद्र रायपुर के विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार साहू ने किसानों को धनियां की उन्नत खेती की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि महंगे बाजारू बीज की बजाय चंद्रहासिनी धनियां-2 और छत्तीसगढ़ धनियां-1 के प्रमाणित बीज अपनाएं. सही दूरी, खरपतवार नियंत्रण और संतुलित खाद से किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन व आय प्राप्त कर सकते हैं.
‘छत्तीसगढ़ धनियां-1’ किस्म भी बेहतर उत्पादन
डॉ. मनोज कुमार साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मौसम को ध्यान में रखते हुए ‘चंद्रहासिनी धनियां-2’ किस्म किसानों के लिए बेहद उपयुक्त है. इसके अलावा ‘छत्तीसगढ़ धनियां-1’ किस्म भी बेहतर उत्पादन देने वाली किस्म मानी जाती है. इन दोनों किस्मों के प्रमाणित बीज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में उपलब्ध हैं, जिन्हें अपनाकर किसान कम लागत में अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं.
खरपतवारों का समय पर नियंत्रण बेहद जरूरी
उन्होंने बताया कि जो किसान इस समय धनियां की खेती कर रहे हैं, उन्हें विशेष रूप से खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान देना चाहिए. धनियां की फसल में चीनौरी और भथुआ जैसे खरपतवारों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है, जो पौधों से पोषक तत्व छीन लेते हैं और उत्पादन पर नकारात्मक असर डालते हैं. इसलिए खरपतवारों का समय पर नियंत्रण बेहद जरूरी है.
डॉ. मनोज कुमार साहू ने बताया कि धनियां की खेती हमेशा लाइन से बुआई करके करनी चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. इस वैज्ञानिक दूरी से पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे उनकी बढ़वार अच्छी होती है और बीज का आकार भी बेहतर बनता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि धनियां को बहुत घना लगाया जाए तो बीज छोटे रह जाते हैं और फसल में रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है.
खाद और उर्वरक प्रबंधन पर जानकारी देते हुए डॉ. साहू ने बताया कि धनियां की फसल में बहुत अधिक खाद देने की आवश्यकता नहीं होती. फिर भी आवश्यकता अनुसार डीएपी का छिड़काव किया जा सकता है. इसके अलावा एक गुड़ाई के बाद 20 से 25 प्रतिशत यूरिया प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव करने से फसल की बढ़वार बेहतर होती है.
उन्होंने बताया कि धनियां की फसल मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है पत्ती वाली और बीज वाली. पत्ती वाली धनियां को अपेक्षाकृत घना लगाया जा सकता है. किसान धनियां की 3 से 4 कटाई कर हरी पत्तियों के रूप में बाजार में बेच सकते हैं और अंतिम कटाई के बाद फसल को बीज के लिए छोड़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि केवल पत्ती वाली धनियां बेचकर भी किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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