लगभग 100 दिन जेल में रहने के बाद शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। रिहाई की खबर मिलते ही समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और जमानत देना आरोपी का विधिक अधिकार है।
यह पूरा मामला 4 नवंबर 2025 को सीधी जिले में सामने आया था। आरोप है कि विवेक पांडे ने स्वास्थ्य सेवाओं में कथित लापरवाही के विरोध में कार्यालयीन समय के दौरान सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे के चेहरे पर कालिख पोत दी थी। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह विरोध सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली के खिलाफ था। पांडे का आरोप था कि डॉ. खरे सरकारी सेवा देने में विफल रहे और निजी नर्सिंग होम में मरीजों का उपचार कर रहे थे।
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने विवेक पांडे और उनके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पांडे ने इस कार्रवाई को जनता की स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था।
वहीं, डॉ. खरे ने अदालत में पेशियों के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और जान का खतरा होने की आशंका व्यक्त की। उनके इन दावों के आधार पर निचली अदालतों ने पूर्व में जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
मंगलवार को हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं। अदालत ने यह भी माना कि सुरक्षा संबंधी पहलुओं की समीक्षा की जा सकती है, लेकिन केवल आशंकाओं के आधार पर जमानत के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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