राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने शुक्रवार को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय और एमबीएम विश्वविद्यालय की की समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने शैक्षणिक प्रगति, परीक्षा प्रणाली, नई शिक्षा नीति के क्रिया
आयुर्वेद विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो. गोविंद सहाय शुक्ल ने वर्ष 2025–26 की प्रवेश स्थिति, परीक्षा परिणाम, एनईपी–2020 के कार्यान्वयन, अनुसंधान गतिविधियाँ, वित्त पोषित परियोजनाएँ और एमओयू की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि एनएसएस–एनसीसी, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में विद्यार्थी राज्य, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कर रहे हैं। गोद ग्राम में आयुर्वेद आधारित जनजागरूकता और सामुदायिक कल्याण गतिविधियाँ भी सतत जारी हैं।
राज्यपाल बागड़े ने कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्र निर्माण का वैचारिक केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को पूर्णतया पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने, राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर अध्ययन–अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा प्रति माह प्रतिष्ठित विद्वानों को आमंत्रित कर विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए ज्ञान–सहभागिता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
बैठक में निर्देश देते राज्यपाल बागड़े।
बैठक के बाद राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने विश्वविद्यालय परिसर में पूर्व में किये गए 363 खेजड़ी पौधों के सामूहिक वृक्षारोपण के स्थल का पुनः अवलोकन किया और पौधों की संरक्षण व्यवस्था और उनकी वृद्धि की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल कार्यक्रम न होकर उत्तरदायित्व और निरंतर देखभाल है, इसलिए प्रत्येक पौधे को पूर्ण विकसित वृक्ष बनाने के संकल्प के साथ संरक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
कृषि शिक्षा को नवाचार से जोड़कर किसान और राष्ट्र – दोनों को करें मजबूत
कृषि विश्वविद्यालय की बैठक में कुलगुरु डॉ. विरेन्द्र सिंह जैतावत ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों, प्रवेश की स्थिति, परीक्षा सुधार, शोध परियोजनाओं, सामुदायिक गतिविधियों और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। साथ ही विश्वविद्यालय के समक्ष उपस्थित चुनौतियों से भी राज्यपाल को अवगत कराया।
राज्यपाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय की सफलता तभी सार्थक होगी जब यहाँ विकसित ज्ञान, शोध और नवाचार सीधे खेत–खलिहान तथा किसान तक पहुँचें। उन्होंने कृषि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, परिणामोन्मुख और स्थानीय कृषि आवश्यकताओं से जुड़ा बनाने पर बल दिया।

विश्वविद्यालय में मशीन का निरीक्षण करते राज्यपाल।
राज्यपाल ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जल–संरक्षण आधारित कृषि तथा स्थानीय फसल प्रजातियों के संवर्धन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता व्यक्त की। उन्होंने नियमित ऑडिट व्यवस्था सुदृढ़ करने, छात्रों के समग्र विकास के लिए पृथक व्यायामशाला, खेल मैदान, स्विमिंग पूल और छात्रावासों में स्वच्छता व पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वर्षा जल संरक्षण को विश्वविद्यालय की विशेष पहचान बनाने की सलाह भी दी।
उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा वही जो ज्ञान के साथ चरित्र, कौशल और नवाचार की क्षमता का करें विकास
वहीं, राज्यपाल ने एमबीएम विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक में शैक्षणिक कार्यक्रमों, तकनीकी अनुसंधान, अधोसंरचना, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, शोध संस्कृति, छात्रावास व्यवस्था तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
कुलगुरु प्रो. अजय शर्मा ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति, एआई आधारित गतिविधियों, स्किल डेवलपमेंट, प्रत्यायन स्थिति और गोद लिए गए डॉली ग्राम की गतिविधियों का विवरण राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया।

विश्वविद्यालय की बैठक लेते रज्यपाल।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि तकनीकी शिक्षा केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न होकर चरित्र, कौशल और नवाचार का विकास सुनिश्चित करे। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छता एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने तथा समय-समय पर पाठ्यक्रमों को उद्योगोन्मुखी बनाने के निर्देश दिए।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों के लिए प्रेरित करने, शोध संस्कृति को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरों एवं विशेषज्ञों के साथ एक्सचेंज कार्यक्रम आयोजित करने तथा विश्वविद्यालय के सभी संसाधनों को विद्यार्थी हित में केंद्रित रखने का आह्वान किया।
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