गोपालगंज में जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम के तहत एक मीडिया संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “भ्रम बनाम तथ्य तथा रोजगार से परिसंपत्ति तक” रहा। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त गौरव कुमार सहित जिले के विभिन्न मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे। संवाद का उद्देश्य अधिनियम से संबंधित वास्तविक जानकारी आम जनता तक पहुंचाना और इससे जुड़ी भ्रांतियों का निराकरण करना था। इस दौरान बताया गया कि यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रति वर्ष 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है। योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में भी कार्य करती है। अधिनियम के अंतर्गत जल संरक्षण एवं जल-संबंधित कार्य, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास, आजीविका उन्मुख अवसंरचना निर्माण तथा जलवायु अनुकूल गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही, विकसित ग्राम पंचायत योजना के सभी कार्यों को राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। श्रेणियों में विभाजित कर योजनाओं का चयन किया जाएगा जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका आधारित अवसंरचना तथा आपदा शमन से संबंधित कार्यों के माध्यम से ग्रामीण विकास को समग्र दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया जाएगा। पंचायतों को उनके विकास मानकों के आधार पर श्रेणियों में विभाजित कर योजनाओं का चयन किया जाएगा, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास संभव हो सके। योजना के वित्तीय प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि केंद्र एवं राज्य सरकार की भागीदारी 60:40 के अनुपात में होगी। विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है। व्यवस्थाओं को लागू कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी योजना के अंतर्गत डिजिटल मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन, सोशल ऑडिट एवं साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण जैसी व्यवस्थाओं को लागू कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। मीडिया संवाद में अधिनियम के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी दी गई। इसके अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन, होर्डिंग्स एवं पोस्टर के माध्यम से जनजागरूकता, पंचायत भवनों एवं सार्वजनिक स्थलों पर दीवार लेखन तथा जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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