पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लगाए गए पेड़ भी फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण की चपेट में आकर नष्ट हो रहे हैं. इस बारे में बैकुंठपुर थानाध्यक्ष सुभाष कुमार ने बताया कि ग्रामीणों से प्राप्त आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है. जांच के बाद….
ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषित पानी उनके खेतों में भरने से फसलें बर्बाद हो रही हैं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. इतना ही नहीं, पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लगाए गए पेड़ भी फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण की चपेट में आकर नष्ट हो रहे हैं. इस बारे में बैकुंठपुर थानाध्यक्ष सुभाष कुमार ने बताया कि ग्रामीणों से प्राप्त आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है. जांच के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
आपको बता दें कि देश में कई जगहों पर इथेनॉल फैक्ट्रियों के खिलाफ किसान और इसके प्रदूषण के लपेटे में आने वाले लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. हाल ही में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में भी प्रस्तावित इथेनॉल फैक्ट्रियों के खिलाफ किसान विरोध कर रहे हैं. वहां लोग इसे स्थानीय आपत्ति नहीं बल्कि खेती, पर्यावरण और ग्राणीण जीवन के भविष्य को लेकर चिंता बता रहे हैं. यहां प्रदर्शन के दौरान हिंसा भी भड़कने की खबर आई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हालात ऐसे बन गए थे कि इंटरनेट सेवा बंद करनी पड़ी थी.
भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किए और आंसू गैस के गोले चलाए. स्थिति बेकाबू होने पर सुरक्षा बलों को भी पीछे हटना पड़ गया था. अधिकारियों ने इसे राज्य सरकार के स्तर का निर्णय बताते हुए कहा कि किसानों की आपत्ति और मांगो को जिला कलक्टर के जरिए सरकार तक पहुंचाया जाएगा. यह भी आश्वासन दिया गया कि किसानों की सहमति के बिना किसी तरह का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा. 7 जनवरी को किसान इस मामले को लेकर फिर इकट्ठा होने की योजना में हैं.
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