गोड्डा के किसान नसीब मुर्मू ने जैविक खेती और श्री विधि अपनाकर बंजर भूमि को उपजाऊ बना दिया है. मात्र 10 कट्ठा जमीन पर बैंगन उगाकर वे लाखों की कमाई की ओर अग्रसर हैं. जीविदा हासा परियोजना के सहयोग से उन्होंने असंभव को मुमकिन कर दिखाया है.
किसान नसीब मुर्मू ने बताया कि जिस भूमि पर आज हरी-भरी सब्जियों की फसल लहलहा रही है, वह कुछ वर्ष पहले तक खेती के लायक नहीं थी. जमीन की उर्वरता पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और फसल उगाना लगभग असंभव माना जाता था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जैविक खेती को अपनाने का निर्णय लिया. लगातार जैविक खाद, गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट और प्राकृतिक तरीकों के इस्तेमाल से धीरे-धीरे जमीन की सेहत सुधरती चली गई.
वर्तमान में नसीब मुर्मू ने श्री विधि से जैविक माध्यम द्वारा बैंगन की खेती की है, जो काफी सफल साबित हो रही है. उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने करीब 10 कट्ठा भूमि में बैंगन की खेती की है. खास बात यह है कि प्रत्येक पौधे में औसतन 3 से 4 किलोग्राम बैंगन का फलन हो रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि भूमि अब पूरी तरह उपजाऊ हो चुकी है.
जैविक खाद ने किया कमाल
किसान के अनुसार, बैंगन की फसल से उन्होंने शुरुआती सीजन में ही करीब 10 हजार रुपये की कमाई कर ली है, जबकि आगे फसल और भी अच्छी आमदनी देने वाली है. उन्होंने बताया कि इस खेती में करीब 20 हजार रुपये की लागत आई थी, जिसमें बीज, जैविक खाद और अन्य आवश्यक खर्च शामिल हैं. आने वाले दिनों में लागत निकलने के बाद मुनाफा और बढ़ने की उम्मीद है.
नसीब मुर्मू अपनी उपज को स्थानीय हाट-बाजारों में बेचते हैं, जहां जैविक सब्जियों की अच्छी मांग रहती है. स्थानीय लोग भी बिना रसायन वाली सब्जियां खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे किसानों को बेहतर दाम भी मिल रहा है. वहीं इस खेती में नसीब को कृषि विज्ञान केंद्र अंतर्गत जीविदा हासा परियोजना से अभी काफी लाभ मिला है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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