मैं पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत के अंतिम छोर पर पहाड़ी के ऊपर बसे बारुनिया गांव का 50 वर्षीय किसान हूं। मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद आर्थिक संकट के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर सका। परिवार चलाने की जिम्मेदारी भी मेरे कंधे पर थी।
ज्यादा जमीन नहीं रहने के कारण ठीक से खेती भी परिवार नहीं कर पाता था। आर्थिक तंगी के कारण आगे की पढ़ाई छोड़ कर आज नींबू की खेती से सालाना लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहा हूं। जिससे न केवल मेरा परिवार खुशहाल हुआ है, बल्कि पूरे गांव के किसानों मुझसे सलाह लेकर खेती करते हैं।
बंजर जमीन उगा रही सोना
मेहनत तथा लगन ने साबित कर दिया है कि बंजर जमीन भी सोना उगल सकती है। मेरे पास अधिकांश खेत पथरीला और बंजर था। पहाड़ी पर गांव होने के कारण सब्जी और अन्य फसलों के लिए पानी की भारी कमी थी। मैंने पथरीली जमीन पर नींबू की खेती शुरू की। क्योंकि नींबू के पौधों को बहुत कम पानी और विशेष रखरखाव की जरूरत होती है। लगभग दो एकड़ जमीन को समतल बनाकर सौ से अधिक नींबू के पौधे लगाए।
आज, 25 वर्षों से वे नींबू की खेती कर रहे हैं और हर साल इन पौधों से दो लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है। नींबू भी पारंपरिक सामान्य प्रजाति का है। बंजर पहाड़ी जमीन पर सामान्य प्रजाति का पौधा से बेहतर उत्पादन होता है।राज कपूर नींबू के अलावा धान की खेती भी करते हैं।
धान वर्ष में एकबार बरसात के मौसम में किया जाता है। जिससे अपने घर की अनाज आवश्यकता पूरी होती है।सबसे खास बात यह है कि इसमें अलग से बीज या खाद खरीदने का कोई खर्च नहीं होता है। पिछले पांच वर्षों से पीएम कुसुम योजना का लाभ उठाकर अपने खेत पर सोलर पंप लगाया है। सोलर पंप से नियमित सिंचाई करने से नींबू का फल अधिक प्राप्त होने लगा है, जिससे उनकी आय में और वृद्धि हुई है।
नींबू खरीदने ओडिशा से आते हैं खरीदार
मेरी सफलता से प्रेरित होकर बारुनिया गांव के अन्य किसान भी अब नींबू की खेती कर रहे हैं। शत्रुघ्न महतो ने 80 पौधे, राम प्रसाद महतो ने 90 पौधे लगाए हैं। हरिपदो महतो के बगीचे में भी 60 नींबू के पौधे हैं।
बाले बोयपाई, लोसो दिग्गी और राम महतो गांव के अन्य बड़े नींबू किसान हैं। सीजन में ओडिशा के खरीदार गांव से ही थोक भाव से नींबू खरीद कर ले जाते हैं, जिससे उन्हें बेचने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
जानिए… कौन हैं राजकपूर महतो
राजकुमार महतो स्वर्गीय बुधू महतो के बेटे है। उनके पिता भी किसान थे। 25 वर्ष पहले नींबू की खेती करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद नींबू की खेती शुरू की। मेरी दो बेटियां और पत्नी निर्मला महतो खेती के काम में पूरा सहयोग देती हैं। एक बेटी की शादी कर चुके हैं।
दूसरी बेटी केजीवीबी जमशेदपुर में पढ़ रही है। वे अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेती के भी गुर सिखाते हैं जिससे की भविष्य में वे उन्नत खेती कर सकें। आसपास के किसान अपनी जमीन जब भी खेती से जुड़ी सलाह लेने आते हैं तो उन्हें वे पूरी जानकारी देते हैं।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.