कोयले की मौजूदगी की सूचना मिलते ही रेत खनन घाटों पर ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग बोरियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर कोयला ले जाते नजर आए। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नदी से सटे क्षेत्र में कोयले की मोटी परतें जमीन की सतह के काफी नजदीक मौजूद हैं।
लिग्नाइट और थर्मल कोल के संकेत
गौरतलब है कि करीब पांच महीने पहले कटनी में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 56 हजार 400 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू साइन हुए थे। उस समय जिले में सोने और क्रिटिकल मिनरल्स की संभावनाएं सामने आई थीं। अब लिग्नाइट और थर्मल कोल के संकेत मिलने से कटनी की खनिज पहचान और अधिक मजबूत होती नजर आ रही है।
लोगों पर प्रशासन की नजर
कटनी जिला खनिज अधिकारी रत्नेश दीक्षित ने बताया कि ग्राम पंचायत लोहरवारा की उमरार नदी से सटे रेत खनन क्षेत्र में कोयले के भंडार की सूचना प्राप्त हुई है। वर्तमान में कुछ लोग अवैध रूप से कोयले का उत्खनन और परिवहन कर रहे हैं, जिस पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है।
जीएसआई की टीम करेगी जांच
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही खनिज विभाग और भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीम मौके पर पहुंचकर सैंपलिंग और सर्वे कार्य करेगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कोयले के भंडार का क्षेत्रफल कितना है और उसकी गुणवत्ता कैसी है।
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मध्य प्रदेश को होगा बड़ा फायदा
यदि सर्वे रिपोर्ट सकारात्मक आती है, तो भविष्य में कटनी जिले में एक बड़ी कोल खदान विकसित की जा सकती है। इससे न केवल मध्यप्रदेश शासन को बड़ा राजस्व प्राप्त होगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। फिलहाल प्रशासन ने अवैध उत्खनन पर सख्ती बढ़ाने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट यह तय करेगी कि कटनी की धरती के नीचे छिपा यह खनिज खजाना कितना बड़ा है।
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