बाड़मेर और बालोतरा की सीमाओं में फेरबदल करने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर लिखा कि सीमाओं में 31 दिसंबर की आधी रात को आनन-फानन में किया गया फेरबदल सरकार का एक और तुगलती फरमान है। इससे गुड़ामालानी इलाके की जनता के लिए ज
दरअसल, प्रदेश में एक मात्र बालोतरा और बाड़मेर जिले का पुन सीमांकन शुक्रवार को हुआ। इसमें कांग्रेस सरकार के समय में तय किए गए क्षेत्र को बदल दिया गया है। नए बदलाव में एक बार फिर न केवल राजनीति क्षेत्र बल्कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को नए सिरे से प्राथमिकताएं तय करने की स्थिति पर लाकर खड़ा किया है।
सरहदी जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है। फैसले के पक्षधर बीजेपी और कार्यकर्ता पटाखें फोड़कर खुशी जाहिर कर रहे है। वहीं विपक्ष धरातल से लेकर सोशल मीडिया पर इसका विरोध कर रहे है। इधर धोरीमन्ना में लोगों ने धरना शुरू कर दिया है। पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी धरने का समर्थन करते हुए धरने पर जाने की बात कही है।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार सियासी रोटिया सेकने में व्यस्त है।
गहलोत बोले- जनता की सहुलियत के लिए नहीं आगामी परिसीमन और सियासी समीकरणों को साधने के लिए
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर लिखा कि बाडमेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में 31 दिसंबर की मध्यरात्रि को आनन-फानन में किया गया फेरबदल राज्य सरकार का एक और ‘तुगलकी फरमान’ है। बायतु को बाडमेर और गुड़ामालानी-धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल करने का फैसला प्रशासनिक दष्टि से कतई तर्कसंगत नहीं है। इससे गुड़ामालानी क्षत्र की जनता के लिए जिला मुख्यालय की दूरी कम होने के बजाय और बढ़ गई है, जो आमजन के साथ घोर अन्याय है। यह स्पष्ट है कि यह निर्णय जनता की सहुलियत के लिए नहीं बल्कि आगामी परिसीमन और सियासी समीकरणों को साधने के लिए लिया गया है। हमारी सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने की मंशा से नए जिले बनाए थे, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार जनभावनाओं को दरकिनार कर केवल ‘सियासी रोटियां’ सेकने में व्यस्त है। हम इस जनविरोधी निर्णय की कडे शब्दों में निंदा करते हैं।
विधानसभा कैसे बनेगी
जिलों केपुनर्गठन के बाद अब सवाल यह है कि विधानसभा का परिसीमन किस तरह से होगा? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बाड़मेर में एक नई विधानसभा की कल्पना की जा रही है इसमें बायतु बाटाडू, उण्डू तक तक के इलाक को मिलाते हुए नई विधानसभा बन सकती है। उधर शिव के भी दो हिस्से हो सकते है। इन दो नई गणित से भाजपा की अस्थिर हो रही राजनीति को पटरी पर लाने का प्रयत्न होगा। इधर कांग्रेस के लिए भी दो गुटों (मेवाराम और हरीश चौधरी) मे से कौनसा गुट अब इस इलाके में हावी होगा, यह भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
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