गयाजी के मध्य विद्यालय बसडीहा के प्राचार्य राजेन्द्र प्रसाद की सेवानिवृत्ति पर भावुक कर देने वाला दृश्य दिखा. उनके सरल स्वभाव के कारण छात्राएं उनसे लिपटकर रोने लगीं. ग्रामीणों और शिक्षकों ने उन्हें दुल्हन की तरह सजी गाड़ी और डीजे के साथ शाही अंदाज में विदा कर गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल पेश की.
बताया जा रहा है कि राजेन्द्र प्रसाद लंबे दिनों से बसडीहा मध्य विद्यालय में अपनी सेवा दे रहे थे. सादगीपूर्ण व्यवहार, सरलता और कार्य कुशलता का पूरा विद्यालय परिवार कायल था. उनके पढाने का तरीका और छात्र छात्राओं के साथ लाड प्यार के कारण आत्मीय संबंधों ने गुरु -शिष्य के रिश्ते को और मजबूत कर रखा था. राजेन्द्र प्रसाद स्कूल के सभी अपने बच्चे की तरह प्यार करते थे. कभी भी वह किसी बात के लिए डांट-फटकार नहीं लगाते थे. अगर कभी होमवर्क करके छात्र नहीं लाते थे, तो वो बहुत प्यार से समझाते थे.
बच्चियां लिपट कर रोने लगीं
जैसे ही उनकी विदाई का वक्त आता है, स्कूल की छोटी-छोटी बच्चियां उनसे लिपट जाती हैं और जोर-जोर से रोने लगती हैं. शिक्षक भी भावुक हो जाते हैं और बड़े ही प्यार के साथ बच्चों के सिर पर हाथ फेरकर उन्हें चुप कराते नजर आते हैं. शिक्षक और छात्राओं के बीच का यह अनकहा रिश्ता शब्दों से परे है. यह दृश्य साबित करता है कि शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबों को पढ़ाना नहीं है, बल्कि छात्रों के चरित्र और उनके दिल में जगह बनाना भी है. राजेन्द्र प्रसाद निश्चित रूप से असाधारण रहे होंगे, जिन्होंने इन बच्चों के जीवन पर इतना गहरा प्रभाव डाला.
विदाई समारोह के बाद राजेन्द्र प्रसाद को सज-धज कर दुल्हन की तरह तैयार एक चारपहिया गाड़ी से उनके घर तक छोडा गया. चार पहिया वाहन के आगे डीजे गाड़ी थी और यह ऐसा दृश्य था मानो किसी की बारात निकली हैं. राजेन्द्र प्रसाद के विदाई के दौरान सिर्फ स्कूल के छात्राओं का ही नही बल्कि गांव के लोगों का भी आंखे नम हो गई थी.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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