संतोष कुमार उर्फ टिंकू मल्हारी गांव के किसान परिवार से हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग के बाद बेरोजगारी झेली लेकिन हार नहीं मानी. फिर मेहनत कर बिहार पुलिस में दरोगा का पद हासिल कर सफलता की कहानी लिख दी.
सपना तो इंजीनियरिंग कर अच्छी नौकरी करना था. माता-पिता ने खेती किसानी और मजदूरी कर बेटे को इंजीनियरिंग कराई, लेकिन यह सपना अधूरा रह गया. सिविल सर्विसेज की तैयारी की, लेकिन यहां भी असफलता मिली. लंबे समय तक बेरोजगार रहे. ऐसा लगा था कि इंजीनियरिंग कर गलती कर दी, लेकिन जब बिहार पुलिस में मौका मिला तो चैन की सांस आई. यह कहानी संतोष कुमार उर्फ टिंकू की है. मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक कर चुके हैं. अब बिहार पुलिस में दरोगा बनकर लोगों की सेवा करेंगे.
कोरोना ने तोड़ दी कमर
संतोष अब बिहार पुलिस में दरोगा बनकर लोगों की सेवा करेंगे. बिहार पुलिस अकादमी राजगीर से ट्रेनिंग पूरी होने के बाद कैमूर जिले में पहली पोस्टिंग हुई है. संतोष बताते हैं कि वह इस नौकरी से खुश हैं, लेकिन मंजिल सिविल सर्विसेज ही है. इंजीनियरिंग करने के बाद संतोष को लगा था कि अब उनका सपना पूरा हो गया, लाखों का पैकेज मिलेंगे. लेकिन यह आसान नहीं था. संतोष बताते हैं कि मैकेनिकल ट्रेड होने के कारण इसमें भविष्य नहीं दिख रहा था. नौकरी लेने की काफी कोशिश की, इसी बीच कोरोना आ गया और काफी पीछे चले गए.
घर की आर्थिक स्थिति पहले से खराब थी. परिवार के लोग भी परेशान हो रहे थे. पारिवारिक दबाव भी था कि नौकरी करनी है. इतने खर्च कर इंजीनियरिंग की, लेकिन किसी भी कंपनी से ऑफर नहीं मिल रहे थे. समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है, लेकिन घर वालों ने साथ नहीं छोड़ा. काफी समझाया कि चिंता मत करो, नौकरी मिल जाएगी. घर वालों ने काफी हौसला बढ़ाया. इसी बीच बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर की वैकेंसी आई और पहले प्रयास में ही सफलता मिल गई.
हार के आगे जीत है
संतोष बताते हैं कि फिजिकल की तैयारी करने के लिए दौड़ लगाते थे. फिजिकल टेस्ट पास करना आसान नहीं था. शुरुआत में काफी समस्या होती थी. दर्द इतना होता था कि बर्दाश्त से बाहर था. हाई जंप की तैयारी में कमर में लचक आ गई थी, बड़ी समस्या थी लेकिन बेरोजगारी को दूर कर दरोगा की नौकरी पाने का लक्ष्य था. दर्द की दवा खा कर दौड़ते थे.
संतोष ने फिजिकल की परीक्षा भी पास कर ली. जब रिजल्ट आया तो घर के परिवार में खुशी का माहौल छा गया. इसके बाद संतोष ट्रेनिंग में गए. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अब जॉइनिंग की तैयारी में हैं. संतोष कहते हैं कि संघर्ष के दौरान कभी भी हार नहीं माननी चाहिए. एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है.
About the Author
with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.