छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में फैला उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व फिर चर्चा में है. वर्ष 1984 में स्थापित यह संरक्षित क्षेत्र उदंती और सितानदी वन्यजीव अभयारण्यों से मिलकर बना है. यहां 200 से अधिक ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से वन अमला दुर्लभ वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है. ट्रैप कैमरों में मादा भालू अपने दो शावकों को पीठ पर ले जाते हुए नजर आई है. तेंदुआ, उड़ने वाली गिलहरी, उदबिलाव, मलबार पाइड हॉर्नबिल, पेरेग्रीन फाल्कन, हिरण, चीतल, नीलगाय और हाथियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है. यहां का घना वन क्षेत्र और विविध आवास पक्षियों के लिए अनुकूल माना जाता है. शीतकाल से पहले कई प्रवासी पक्षी भी यहां पहुंचते हैं. रायपुर से लगभग 150 से 200 किमी दूर यह रिजर्व सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. गरियाबंद के लिए NH-130C मार्ग या धमतरी की ओर से पहुंचने की सुविधा है. प्राकृतिक सौंदर्य और दुर्लभ वन्यजीवों की झलक के कारण यह स्थान इको-टूरिज्म के लिहाज से तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है.
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में स्थित उदंती सितानदी टाइगर रिजर्व (USTR) जैव विविधता का खजाना है, जहां 1842.54 वर्ग किमी क्षेत्र में कोर (851.09 वर्ग किमी) और बफर जोन (991.45 वर्ग किमी) शामिल हैं. यह रिजर्व उदंती और सितानदी वन्यजीव अभयारण्यों से मिलकर बना है, जो 1984 में स्थापित हुआ. यहां 200 से अधिक ट्रैप कैमरों से वन अमला वन्यप्राणियों पर नजर रखता है.

विश्व की सबसे तेज उड़ने वाली पक्षी मलबार पाइड हॉर्नबिल और पेरेग्रीन फाल्कन यहां देखे जा चुके हैं. यहां ओध और अम्मोरा पहाड़ियों पर बर्ड वॉचिंग से देखे जा सकते हैं. संरक्षण से वेस्टर्न घाट्स प्रजातियां यहां बस रही हैं. वन्य प्राणी संरक्षण के अलावा प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण होने से यहां कई प्रकार के पक्षी देखे जाते हैं.

वन विभाग ने कहा कि उदंती सीतानाडी बाघ अभ्यारण्य में मलबार पाइड हॉर्नबिल जैसे पक्षियों का आना, रहना और लगातार दिखते रहना प्रसन्नता का विषय है. इस प्रकार के पक्षी और स्तनधारी जीव आमतौर पर केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में स्थित पश्चिमी घाट के जंगलों (सदाबहार वन) में पाए जाते हैं. इनकी मौजूदगी यहां उदंती और सीतानाडी अभ्यारण्य में होना अलग अनुभव है. ये अपने पश्चिमी घाट जैसे प्राकृतिक वातावरण के कारण, बड़ी संख्या में पक्षियों और जानवरों को आकर्षित करते हैं. शीत ऋतु के प्रारंभ से पहले का मौसम पक्षियों के लिए अनुकूल होता है.
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ट्रैप कैमरों में मादा भालू अपने दो शावकों को पीठ पर ले जाते हुए नजर आई है. यहां 200 से अधिक ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से वन अमला दुर्लभ वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है.

उदंती सीतानाडी टाइगर रिजर्व में उड़ने वाली गिलहरी देखी गई है. ये पूरी तरह से निशाचर जानवर हैं, जिसका अर्थ है कि वे अंधेरा होने के बाद सबसे अधिक सक्रिय होते हैं. इनकी विश्व भर में 44 जीववैज्ञानिक जातियाँ हैं जिनमें 12 जातियाँ भारत में पाई जाती हैं.

दुनिया की सबसे बड़ी गिलहरी भारतीय या मालाबार जाइंट गिलहरी (रैटुफा इंडिका) है, जो प्रायद्वीपीय भारत के पर्णपाती और नम सदाबहार जंगलों में पाई जाती है. इसकी कुल लंबाई 1 मीटर तक हो सकती है, जिसमें से दो तिहाई हिस्सा इसकी लंबी, घनी पूंछ होती है.

गरियाबंद के उदंती टाइगर रिज़र्व के ट्रैप कैमरे में कैद नजारे वन्य जीव प्रेमियों को रोमांचित कर रहे हैं. यहां हिंसक जीव टाइगर के अलावा तेंदुआ भी कैमरे में कैद हुआ है. फॉरेस्ट अफसरों का कहना है कि इस पर नजर रखी जा रही है. यह स्वस्थ और फुर्तीला है.

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) हिरण और चीतल का झुंड जंगल की राह पर चलता हुआ. ट्रैप कैमरों में कैद यह दृश्य शाकाहारी जीवों की विविधता दर्शाता है. जिप्सी सफारी में पर्यटक इन्हें करीब से देख सकते हैं. संरक्षण से इनकी आबादी संतुलित बनी हुई है.

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व सुंदर तितलियों का घर भी है. यहां हजारों प्रकार की रंग बिरंगी तितिलियां देखी जा सकती हैं.

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में बड़ी संख्या में नीलगाय देख सकते हैं. यहां उनके लिए हरे चारे के लंबे मैदान हैं जो साल भर उनका भोजन देते हैं. यह एशिया का सबसे बड़ा मृग है और भारतीय घास के मैदानों का एक सच्चा प्रतीक है. उत्तरी और मध्य भारत में पाया जाने वाला यह मजबूत शाकाहारी जानवर अपने नीले-भूरे रंग के फर (नर में), घोड़े जैसी शारीरिक बनावट और गाय जैसे चेहरे के लिए जाना जाता है.

बिज्जू (भारतीय रैटल) या हनी बैजर, भारत में सबसे कम देखे जाने वाले स्तनधारियों में से एक है. ये निशाचर जानवर भारत में सबसे कम अध्ययन किए गए स्तनधारियों में से भी एक हैं. इसे बिज्जू एक स्तनधारी जानवर है जो भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिणपश्चिमी एशिया और अफ़्रीका में मिलता है. यह एक मांसाहारी प्राणी है. अपने लड़ाके स्वभाव और मोटी चमड़ी के कारण अन्य जानवर इस से दूर ही रहते हैं और अन्य खूँखार प्राणी भी इसपर हमला कम ही करते हैं.
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