ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख पुलिस ने फर्जी तरीके से ईसीएचएस( पूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) कार्ड का इस्तेमाल कर अस्पतालों में इलाज कराने वाले एक संगठित गिरोह का मंगलवार को पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन पुरुष और एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक आईफोन-15 मोबाइल, व्हाट्सएप के जरिए इस्तेमाल किए गए फर्जी ईसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड के दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि यह गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और ऐसे लोगों को निशाना बनाता था जो इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ होते थे। गिरोह उन्हें दूसरे व्यक्तियों के नाम और कार्ड पर अस्पताल में भर्ती कराकर लाखों रुपये का इलाज मुफ्त में कराता था और इसके बदले मोटी रकम वसूलता था।
फर्जी नाम से कराया गया इलाज, मरीज की मौत के बाद भी खेल जारी
मामले का खुलासा तब हुआ जब जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अलीगढ़ निवासी एक व्यक्ति की बेटी शालिनी के ईसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड का फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया। इस कार्ड के जरिए गाजियाबाद की रहने वाली तनु नाम की महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया। तनु को 29 जुलाई 2025 को शालिनी के नाम से भर्ती कराया गया और उसका इलाज शुरू हुआ। इलाज के दौरान करीब 6 लाख 50 हजार रुपये का खर्च आया, जिसे आरोपियों ने बचा लिया। हालांकि, 5 अगस्त 2025 को इलाज के दौरान तनु की मौत हो गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि मौत के बाद भी आरोपियों ने अस्पताल में असली पहचान छिपाए रखी और शालिनी के नाम पर ही डेथ सर्टिफिकेट लगवाकर शव प्राप्त कर लिया।