पंजाब पर पहले ही कर्ज का बोझ है और मुफ्त की योजनाएं व सब्सिडी सूबे पर और भार बढ़ा रही हैं। राज्य का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 46.6% है, जो अरुणाचल प्रदेश के बाद सबसे अधिक है। अरुणाचल का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 57 प्रतिशत है। वेतन, पेंशन, ब्याज व कर्ज का मूलधन चुकाने के लिए पंजाब सबसे अधिक खर्च कर रहा है।
वित्त मंत्रालय ने पिछले महीने संसद में एक रिपोर्ट पेश की। इसके अनुसार सूबे का ऋण-जीएसडीपी अनुपात वर्ष 2023-24 में 47.1% था जो वर्ष 2024-25 के संशोधित बजट अनुमान में मामूली सुधार के साथ 46.7% दर्ज किया गया है। वर्ष 2025-26 बजट अनुमान में भी यह 46.6% बना हुआ है। ऋण-जीएसडीपी अनुपात एक ऐसा माप है जो किसी राज्य के सार्वजनिक ऋण की तुलना उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से करता है।
कम ऋण-जीडीपी अनुपात यह दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था बिना और अधिक ऋण लिए कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती है। इस तरह अधिक ऋण-जीएसडीपी अनुपात किसी भी प्रदेश के लिए सही नहीं है। प्रदेश पर वर्ष 2024-25 के दौरान अनुमानित कर्ज 3.82 लाख करोड़ रुपये था। 2025-26 के बजट के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष के अंत तक प्रदेश पर 4.17 लाख करोड़ का कर्ज हो जाएगा।
सरकार के लिए इस कर्ज को कम करना सबसे बड़ी चुनौती है। सूबे के पास खर्च के लिए 7% राशि ही बची है जबकि प्रदेश को 90 हजार करोड़ रुपये का मूलधन भी चुकाना है जिस कारण इसे चुकाने के लिए प्रदेश को और कर्ज लेना पड़ सकता है। पंजाब पहले ही पिछले वर्ष अक्तूबर में 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले चुका है जिससे सूबे पर मूलधन की अदायगी का बोझ बढ़ सकता है। बजटीय अनुमान के मुताबिक राज्य की कमाई 1.12 लाख करोड़ रुपये है। इसमें 20% राशि मुफ्त की योजनाओं और सब्सिडी पर खर्च हो रही है जबकि 73.1% राशि वेतन, पेंशन और ब्याज पर खर्च हो रही है। इसी तरह कर्ज का मूलधन चुकाने के लिए भी राज्य को बड़ी राशि की आवश्यकता है।
बिजली सब्सिडी सरकार के लिए बनी बड़ी समस्या
प्रदेश की मौजूदा सरकार के लिए बिजली सब्सिडी सबसे बड़ी समस्या बन गई है। प्रदेश में प्रत्येक कनेक्शन पर 300 यूनिट प्रति माह निशुल्क बिजली दी जाती है। सरकार ने विधानसभा चुनाव में किया अपना वादा तो पूरा कर दिया लेकिन अगर इसका दूसरा पहलू देखें तो बिजली सब्सिडी पर सरकार का करीब 20 से 22 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहा है। 16वें वित्तीय कमीशन की बैठक में भी बिजली सब्सिडी का विकल्प खोजने के लिए सरकार को कहा गया था।
जीएसटी सुधारों से प्रदेश को राजस्व की आस
जीएसटी दरों में कटौती का पंजाब की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर दिख रहा है। वित्तीय वर्ष 2026 में कटौती से जीएसटी राजस्व में 6.7 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है जिससे सरकार की झोली में 28,507 करोड़ रुपये आएंगे। स्टेट ऑफ बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025 में जीएसटी से सरकार को 26,721 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ लेकिन वित्तीय वर्ष 2026 में इसमें 1786 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने का अनुमान अच्छे संकेत हैं।
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