पंजाब के पूर्व सांसद और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के प्रधान सिमरनजीत सिंह के दोहते गोविंद सिंह संधू की शादी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं हैं। अकाली नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने इससे जुड़ी तस्वीरें शेयर कर ऐतराज जताया है। उनका आरोप है कि संधू ने शादी के दौरान कुछ रस्मों में घार्मिक प्रतीकों जैसे चौर और छत्र साहिब का इस्तेमाल किया, जो सिख मर्यादा के खिलाफ है। जैसे ही यह मामला तूल पकड़ने लगा तो गोविंद सिंह संधू सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इस संबंध में माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि अनजाने में गलती हुई है। हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं। काफी लोग शादी में शामिल हुए थे गोविंद सिंह संधू की शादी सराह कौर ढिल्लों से हुई है। यह शादी काफी हाई-प्रोफाइल रही। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें मान की बेटी के बेटे संधू को चलते हुए दिखाया गया है। वीडियो में उनके सिर के ऊपर चौर (मोर पंख का पंखा) घुमाया जा रहा है। वहीं, एक अन्य व्यक्ति उनके ऊपर छत्र (राजसी छाता) पकड़े नजर आता है। पीछे ढोल और बाजों की आवाज सुनाई दे रही है। इसके अलावा, दो पगड़ीधारी सिख युवक भाले लेकर संधू के साथ चलते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सिख समुदाय के एक वर्ग ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि चौर और छत्र सिख धर्म में खास महत्व रखते हैं। ये प्रतीक केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, जिन्हें सिखों का जीवित गुरु माना जाता है, की सेवा और सम्मान से जुड़े होते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए इन प्रतीकों का उपयोग करना सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। वल्टोहा ने पहले बधाई दी, फिर लगाया आरोप शिरोमणि अकाली दल बादल के नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर पहले नवविवाहित जोड़े को आनंद कारज की बधाइयां दीं, लेकिन आगे लिखा कि कि काका गोविंद सिंह संधू द्वारा अपने विवाह के समय किया गया यह कृत्य सिख मर्यादा के खिलाफ है। जैसे ही यह मामला गर्माया, गोविंद सिंह संधू ने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट डालकर माफी मांग ली। संधू ने तीन पाइंट्स में मांगी माफी, जो इस प्रकार है स्पष्टीकरण देना मेरा फर्ज बनता है गोविदं सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनके विवाह समागम में छत्र झुलाने और चौर साहिब करवाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर जताया गया ऐतराज उनके ध्यान में आया है। चूंकि यह ऐतराज सतगुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सर्वोच्चता और सिख भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए वह इस विषय पर एक निमाणे सिख की तरह अपना स्पष्टीकरण देना अपना फर्ज समझते हैं। अपनी परंपरा निभाने की कोशिश की छत्र झुलाने और चौर साहिब करवाने की रस्म पुरातन रियासती विवाह समागमों की परंपरा का हिस्सा रही है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आई है। शाहजादपुर रियासत के वंशज होने के कारण, शादी के लिए जाते समय (जंज चढ़ने) की रस्म शाहजादपुर रियासत की परंपरा के अनुसार सत्कार के रूप में निभाने की कोशिश की गई। गुरु साहिब के बराबरी की हिम्मत नहीं कर सकता उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रियासतों के दौर के बाद अब यह सत्कार केवल धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लिए ही आरक्षित है। सिखों के चौर और छत्र के तख्त के मालिक केवल धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हैं, जिनकी अपार कृपा से ही हम खुशियां मना रहे हैं और जिनकी शान की बराबरी करने की हिम्मत कोई मनुष्य सोच भी नहीं सकता। गुरु साहिब जी के बराबर कोई नहीं हो सकता उन्होंने समूह संगत से विनती की कि दस मिनट की निभाई गई इस रस्मी परंपरा को गुरु साहिब के बराबर न समझा जाए, क्योंकि धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के बराबर न कभी कोई था, न है और न ही हो सकता है। उन्होंने इस गलती की पूरी जिम्मेदारी स्वयं ली और माना कि चौर साहिब झुलाना गलत था। अंत में उन्होंने समूह संगत से दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगी और आशा जताई कि अनजाने में हुई इस भूल को क्षमा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे इसकी अरदास गुरु साहिब के चरणों में करेंगे।
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