चिल्फी घाटी क्षेत्र अंतर्गत आदिमजाति सेवा सहकारी समिति चिल्फी से जुड़े 100 से अधिक किसान इन दिनों प्रशासनिक और तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि वन पट्टा का फिजिकल वेरिफिकेशन अब तक नहीं हो पाया है, पिछले वर्ष का डेटा सही तरीके से कैरी फॉरवर्ड नहीं किया गया है और एग्री स्टैक पोर्टल लंबे समय से बंद या बाधित रहने के कारण धान विक्रय के लिए टोकन नहीं कट पा रहे हैं। इसके चलते इस क्षेत्र में धान खरीदी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। प्रभावित किसानों में दुजबाई, सोनसाय, लामू, तुंगा, कलाबाई, शिवदास सहित बड़ी संख्या में आदिवासी एवं सीमांत किसान शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि उनके पास वैध वन अधिकार पत्र (वनपट्टा) मौजूद है, इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं किया गया। वेरिफिकेशन के अभाव में पोर्टल पर उनका नाम और रकबा अपडेट नहीं हो पा रहा है, जिससे वे धान विक्रय के लिए पात्र होते हुए भी टोकन से वंचित हैं। किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की समस्याएं सामने आई थीं, लेकिन उस समय अस्थायी समाधान कर धान खरीदी की गई। इस वर्ष भी पिछले वर्ष का डेटा सही ढंग से कैरी फॉरवर्ड नहीं किया गया, जिससे पुरानी त्रुटियां जस की तस बनी हुई हैं। कई किसानों के रकबे कम दिख रहे हैं तो कई के नाम ही पोर्टल से गायब हैं। ऐसे में समिति स्तर पर भी खरीदी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
टोकन नहीं कटने की स्थिति में भंडारण करने में हो रही परेशानी धान कटाई के बाद किसान आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में मेहनत के बाद जब धान मंडी तक नहीं पहुंच पा रहा, तो किसानों की चिंता और बढ़ गई है। टोकन नहीं कटने की स्थिति में धान का लंबे समय तक भंडारण करना छोटे किसानों के लिए संभव नहीं है। इससे धान खराब होने का खतरा भी बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सरकारी खरीदी नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरी में बिचौलियों को कम दाम पर धान बेचने के लिए विवश होना पड़ेगा, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सर्वर डाउन तो कभी डेटा अपडेट नहीं टोकन कटने की प्रक्रिया पूरी नहीं ग्रामीण किसानों ने बताया कि एग्री स्टैक पोर्टल कई दिनों तक बंद रहा, और जब चालू भी हुआ तो उसमें तकनीकी खामियां सामने आईं। कभी सर्वर डाउन होने की समस्या आई तो कभी डेटा अपडेट नहीं हो सका। समिति कर्मचारियों द्वारा कई बार प्रयास करने के बावजूद टोकन कटने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे सामूहिक आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। किसानों ने कहा कि वे प्रशासन से टकराव नहीं चाहते, लेकिन उनकी आजीविका का सवाल जुड़ा है।
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