प्रदेश में न्यायिक कार्यवाही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का प्रयोग करते हुए पहली बार अदालत में एक सुनवाई संपन्न हुई। यह ऐतिहासिक सुनवाई संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताए जाने के दावे के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हुई। इस मामले में घायल हुए एक उपनिरीक्षक की गवाही को एआई की मदद से दर्ज किया गया, जो न्याय प्रक्रिया में सटीकता और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
जनपद न्यायाधीश की अदालत में हुई इस कार्यवाही में प्रशासनिक न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल भी उपस्थित रहे। यह मामला 24 नवंबर को हुई हिंसा से संबंधित है, जिसमें चार लोगों की मृत्यु हो गई थी। अपराध संख्या 340/24, सरकार बनाम मुल्ला अफरोज के मुकदमे में, एआई उपकरणों का उपयोग करते हुए जिला न्यायाधीश विदूषी सिंह की उपस्थिति में सुनवाई हुई। इस मामले में घायल हुए उपनिरीक्षक राजीव कुमार की गवाही एआई के माध्यम से दर्ज की गई, जिनके दाहिने हाथ में फ्रैक्चर हुआ था। अभियुक्त मुल्ला अफरोज और अभियुक्त गुलाम की ओर से वकीलों ने जिरह की। यह इस मुकदमे की सातवीं गवाही थी।
न्यायिक प्रक्रिया में एआई का समावेश
उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने शुक्रवार को संभल जिला न्यायालय का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के लिए एआई टूल्स का उद्घाटन किया। इसके साथ ही, कंप्यूटरीकृत कॉपिंग सेंटर और पोस्ट ऑफिस का भी लोकार्पण किया गया। इस पहल से संभल उत्तर प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां न्यायिक कार्यवाही में इस आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
एआई तकनीक के प्रयोग से गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी होने की उम्मीद है। इससे न्यायालयों के समय की भी बचत होगी, जिससे न्याय प्रक्रिया को गति मिलेगी। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश डॉ. विदूषी सिंह, अन्य न्यायिक अधिकारी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, सचिव तीरथराज यादव, जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित और अन्य गणमान्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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