संयुक्त किसान मोर्चा अपनी मांगों के संदर्भ में देश भर के किसानों का समर्थन जुटाएगा। इसके लिए मोर्चे की ओर से कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल मार्च की शुरूआत की गई है। इस दौरान विभिन्न गांवों में जनसभाओं व कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। जगजीत सिंह डल्लेवाल समेत अन्य किसान नेता इसकी अगुवाई कर रहे हैं।
शनिवार को कन्याकुमारी से किसान जागृति यात्रा की शुरुआत की गई। इससे पहले एक जनसभा आयोजित की गई जिसे मुख्य तौर पर जगजीत सिंह डल्लेवाल (पंजाब), कुर्बुरु शांताकुमार (कर्नाटक), पीआरपांड्यंन (तमिलनाडु), पी अय्यकन्नू (तमिलनाडु), अभिमन्यु कोहाड़ (हरियाणा), इंदरजीत पन्नीवाला (राजस्थान), लीलाधर राजपूत व अरुण पटेल (मध्यप्रदेश), नितिन बाल्यान (उत्तर प्रदेश), हरसुलिन्दर सिंह व सोनू औलख (पंजाब) ने किसानों को संबोधित किया।
किसान नेताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा का आगाज किया। इस दौरान स्थानीय किसानों ने किसानी मांगों पर गांवों-गांवों से पारित कराए गए प्रस्तावों की प्रतियां जगजीत सिंह डल्लेवाल को सौंपी। किसान नेता डल्लेवाल ने बताया कि भारत-अमेरिका के मध्य हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत के किसानों के हितों को आघात पहुंचाने का कार्य किया गया है।
उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल कह रहे हैं कि खेती व डेयरी सेक्टरों की रक्षा की जाएगी लेकिन भारत-अमेरिका के साझा वक्तव्य में यह कहा गया है कि अमेरिका के खेती व खाद्य उत्पादों के ऊपर लगे नॉन-टैरिफ प्रतिबंधों पर चर्चा करके उनका समाधान निकालने के लिए भारत तैयार हो गया है।
डल्लेवाल ने कहा कि ये दोनों विरोधाभासी बातें हैं और भारत-अमेरिका के साझा वक्तव्य से स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका के दबाव के सामने भारत की सरकार ने अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार को खोलने की स्वीकृति दे दी है जिससे भारत के किसानों को बहुत अधिक नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक मीटिंग कर के संयुक्त किसान मोर्चा भारत-अमेरिका के मध्य हुए मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की घोषणा करेगा।
किसान नेता पी अय्यकन्नू ने कहा कि 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में इस यात्रा के समापन अवसर पर विशाल किसान महापंचायत होगी जिसमें देशभर से किसान बड़ी संख्या में भाग लेंगे। एमएसपी गारंटी कानून पूरे देश के किसानों की सबसे महत्वपूर्ण मांग है और केंद्र सरकार को इसे जल्द से जल्द पूरा करना चहिए।
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