मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद राजधानी रायपुर के लोगों में भी चिंता गहराने लगी है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि रायपुर की कई पानी की पाइपलाइनें सीधे नालों के बीच से गुजर रही हैं। कई जगह लाइनें टूटी हुई हैं
ऐसे में नालों का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिलने का खतरा बना हुआ है। मोवा, सड्डू और जोरा इलाकों में गंदे पानी की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आता है।
सप्लाई बार-बार बंद होने से रोजमर्रा की परेशानियां बढ़ रही हैं। हालांकि, जहरीले पानी से हुई मौतों के बाद रायपुर प्रशासन सतर्क हो गया है। महापौर मीनल चौबे और नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने शहर के अलग-अलग इलाकों का फील्ड निरीक्षण किया।
इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि इंदौर में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की कि छत्तीसगढ़ में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सरकार सभी नगर निकायों और पंचायतों में पेयजल की जांच कराए और यह सुनिश्चित करें कि लोगों को साफ और सुरक्षित पानी मिले।
नालों की सफाई और एसटीपी पर फोकस
महापौर और नगर निगम आयुक्त ने सरोना डंपिंग यार्ड और शीतला माता मंदिर के पास स्थित शासकीय भूमि का सीमांकन कर जनहित के कार्यों की ठोस योजना बनाने के निर्देश दिए।
साथ ही चिंगरी और पीहर नालों की विशेष सफाई कर गंदे पानी को सीधे एसटीपी तक पहुंचाने, उसके उपचार (ट्रीटमेंट) और ट्रीटेड पानी को उद्योगों को बेचकर निगम की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
गंदा पानी बना पीलिया-डायरिया की वजह
दरअसल, रायपुर में गंदे पानी से पीलिया और डायरिया की समस्या हर साल सामने आती है। खासकर बारिश के मौसम में। साल 2020 में पीलिया के मरीजों की संख्या 700 से ज्यादा हो गई थी। 2024 में लाभांडी इलाके में 25 से ज्यादा लोग पीलिया से पीड़ित पाए गए।

2025 में भी पीलिया-डायरिया के मामले, बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
2025 की शुरुआत में भी अभनपुर और आसपास के इलाकों में डायरिया और पीलिया के मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन बीमारियों का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। हालांकि, नगर निगम ने शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-0008 जारी किया है।
टोल फ्री नंबर जारी, लेकिन शिकायतों का समाधान सुस्त
लेकिन लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बाद भी समाधान देर से होता है। नई पाइपलाइन बिछाने के लिए हो रही खुदाई में पुरानी लाइनें और ज्यादा टूट रही हैं, जिससे समस्या और बढ़ रही है।
30-40 साल पुरानी पाइपलाइनें बनीं खतरे की वजह
विशेषज्ञ बताते हैं कि रायपुर की कई मुख्य पाइपलाइनें 30 से 40 साल पुरानी हैं। ज्यादा प्रेशर पड़ते ही ये फट जाती हैं। इससे लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है और गंदा पानी सप्लाई में मिल जाता है, जो सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है।
दूषित पानी से अब तक 16 मौतें
बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 16 मौतें हो चुकी हैं। 150 लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। अलग-अलग हॉस्पिटल के ICU में भर्ती लोगों को एक जगह शिफ्ट किया जा रहा है। शनिवार शाम 6 बजे के बाद ऐसे 12 मरीज बॉम्बे हॉस्पिटल के ICU में लाए गए हैं।
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