केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं को वर्ल्ड क्लास बनाने की सौगात मिली है। दिल्ली के पांच बड़े केंद्रीय अस्पताल (एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग और कलावती सरन चिल्ड्रन अस्पताल) को पिछले साल की तुलना में 3 से 14 प्रतिशत तक अधिक बजट मिला है। इससे नए उपकरण, ज्यादा डॉक्टरों की भर्ती और अस्पताल आधुनिकीकरण से लैस होंगे अस्पतालों का पूंजी व्यय नई बिल्डिंग और मशीनरी में उपयोग होगा। इसमें 8 से 77% तक विकास खर्च बढ़ा है जिससे पुराने अस्पताल अपग्रेड होंगे और सुविधाएं बढ़ेंगी। मरीजों को जल्द और बेहतर इलाज मिलेगा।
केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली के अस्पतालों को 10,100.58 करोड़ रुपये का बजट आवंटन हुआ। एम्स को 5500.92, सफदरजंग को 2170.75 करोड़ मिले है। आरएमएल को 1210.47, लेडी हार्डिंग को 703.40 और कलावती सरन चिल्ड्रेन अस्पताल को 156.62 करोड़ रुपये राजस्व पर खर्च किए जाएंगे।
और आधुनिक होगी स्वास्थ्य सेवा
पूंजी व्यय पर बड़ा बजट दिया है। सबसे ज्यादा पूंजी खर्च के लिए आरएमएल को 240.32 करोड़ रुपये मिले है। पिछले साल 338.10 मिले थे, जिसमें से 147.72 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस साल सफदरजंग अस्पताल को 133 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पिछले साल 238.50 में से 88.79 खर्च किए गए। लेडी हार्डिंग अस्पताल को 92.50 करोड़ रुपये मिले है, जहां पिछले साल 101 में से 85 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। कलावती सरन चिल्ड्रन अस्पताल को 25.60 करोड़ रुपये दिए गए पिछले साल 8.50 करोड़ रुपये मिले, हालांकि 14.40 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
महंगी दवाओं पर राहत, नई योजना
बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत देश को अगले पांच साल में ग्लोबल बायो-फार्मा हब बनाने की तैयारी है, जिसमें 10,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इसमें बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स (कैंसर, डायबिटीज, ऑटोइम्यून बीमारियों की महंगी दवाओं) का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा। इसके चलते दिल्ली में भी दवाएं और सस्ती उपलब्ध होंगी। कैंसर, डायबिटीज, रेयर डिजीज और ऑटोइम्यून बीमारियों की महंगी दवाएं देश में सस्ती बनेंगी। कुछ कैंसर दवाओं पर इंपोर्ट ड्यूटी कम या खत्म होने से कीमतें और नीचे आएंगी।
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