बता दें कि कटनी जिला हवाला का एक बड़ा गढ़ माना जाता है, जिसके तार कई बार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत देश के कई प्रमुख शहरों से जुड़ते रहे हैं। पहले ये पैसा हवाला कारोबारियों के माध्यम से कैश में भेजा जाता था, लेकिन बदलते युग में ये हवाला कारोबार को डिजिटल किया गया है। ऐसा हम इसलिए बोल रहे हैं, क्योंकि अब इन पैसों को भेजने के लिए एक गाड़ी नहीं बल्कि बहुत सारे फेंक बैंक अकाउंट का इस्तेमाल होता है। इसके लिए ये हवाला कारोबारियों या तो किराए में बैंक अकाउंट लेते हैं जिसके एवज में उनके महीने के 15 से 20 हजार रुपए महीने का भुगतान दिया जाता है या फिर ट्रांसफर राशि पर कुछ पर्सेंट दिया जाता है।
माधवनगर टीआई संजय दुबे ने बताया कि उनके पास ऑनलाइन फंड ट्रांसफर से जुड़े अब तक पांच प्रकरण समाने आए हैं, जिसमें ट्रेडिंग अकाउंट, म्यूल अकाउंट, ट्रेडिंग इंडीकेटर समेत इंपर्सनेशन एंड म्यूल अकाउंट जैसे मामले शामिल हैं जिससे जुड़े करीब 30 से 40 फेंक अकाउंट से लाखों करोड़ों रुपयों के ट्रांजेक्शन होना मिला है। कटनी पुलिस की मानें तो फेंक अकाउंट से घूमने वाला ये पैसा हवाला या ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा का हो सकता है, जिसकी जांच करने में साइबर टीम जुटी है। वहीं कटनी पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने कटनी में तेजी से खुलते फर्जी बैंक अकाउंट को लेकर गंभीरता जाहिर करते हुए बैंक अधिकारियों से बैठक की है। इसमें उन्हें संदिग्ध लेन देन करने वाले खाताधारकों की जानकारी देने की बात कही है।
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हालांकि कटनी पुलिस ने कुछ मामले इसे पकड़े हैं, जिसमें बिना किसी जानकारी के यानि धोखाधड़ी करते हुए किसी भी अज्ञात शख़्स के डॉक्यूमेंट का दुरुपयोग करते हुए फेंक अकाउंट खुलवा लेते हैं। बिना उसकी जानकारी के उससे लाखों करोड़ों रुपए ऑनलाइन भेजते हुए डिजिटल हवाला को अंजाम देते हैं। चूंकि कटनी जिला न सिर्फ हवाला का गढ़ है बल्कि ऑनलाइन गेमिंग सट्टा का गढ़ भी माना जाता है जिसे लेकर कई प्रदेश स्तर पर नेताओं की बयानबाजी समाने आ चुकी है। वहीं कोतवाली पुलिस ने भी ऐसा ही एक मामला पकड़ा है जिसमें रजनी यादव समेत दो को गिरफ्तार किया है। इस मामले पर माधवनगर की किसी अंजली नामक महिला का नाम भी सामने आया है, लेकिन फेक अकाउंट मामले का मास्टर माइंड कौन है इसकी जांच पुलिस कर रही है। बता दें कटनी जिले का ये कोई पहला मामला नहीं जहां पुलिस के हाथों फर्जी अकाउंट और करोड़ों के लेन देन से जुड़ा मामला हाथ लगा है, बावजूद इसके मुख्य आरोपी तक अब तक इनके हाथ न पहुंचना ही पुलिस की कार्यशैली में सवाल उठाता है। फिलहाल पूरे मामले पर क्या कुछ खुलकर सामने आता है ये देखना बाकी है।
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