झारखंड कांग्रेस के नाराज बताए जा रहे पांच विधायक दिल्ली प्रवास के बाद अब अपने-अपने गृह क्षेत्रों में लौट आए हैं। कई दिनों तक दिल्ली में डेरा डालने के दौरान इन विधायकों ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर संगठन, सरकार और जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। दिल्ली जाने वाले विधायकों में राजेश कच्छप, सोनाराम सिंकु, नमन विक्सल कोंगाड़ी, रामचंद्र सिंह, सुरेश बैठा और भूषण बाड़ा शामिल थे।
विधायकों ने स्पष्ट किया कि उनका दिल्ली दौरा किसी व्यक्तिगत नाराजगी या पद की मांग से जुड़ा नहीं था, बल्कि प्रदेश के जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं, अपेक्षाओं और संगठनात्मक कमियों को आलाकमान तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था। सभी विधायकों ने एक स्वर में कहा कि यदि पार्टी को मजबूत करना है, तो समय रहते जरूरी सुधार किए जाने चाहिए।
कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने बताया कि शीर्ष नेतृत्व को यह जानकारी दी गई है कि हेमंत सोरेन सरकार के एक वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब भी कई बोर्ड और निगम रिक्त पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों पर योग्य और संघर्षशील कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाना चाहिए। साथ ही जिन कार्यकर्ताओं को किसी कारणवश टिकट नहीं मिल सका, लेकिन जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए संघर्ष किया है, उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।
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राजेश कच्छप ने यह भी कहा कि पार्टी को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनने की जरूरत है। 2029 में केंद्र में सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस को लगातार संघर्ष करना होगा, जैसा कि राहुल गांधी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव के दौर में नए प्रयोग और जनभावनाओं को समझना बेहद जरूरी है। विधायक भूषण बाड़ा ने कहा कि राज्य में कांग्रेस कोटे से बने चार मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष है। इसी नाराजगी और फीडबैक को आलाकमान तक पहुंचाने के लिए सभी विधायक सामूहिक रूप से दिल्ली गए थे।
वहीं विधायक सुरेश बैठा ने कहा कि कांग्रेस में कई ऐसे योग्य विधायक हैं, जिनमें मंत्री बनने की क्षमता है। केवल वर्तमान मंत्री ही एकमात्र विकल्प नहीं हैं और आवश्यकता पड़ने पर मंत्रिमंडल में बदलाव पर भी विचार किया जा सकता है। नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि संगठन को और अधिक धारदार बनाने तथा सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीर्ष नेतृत्व इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा।
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