सऊदी अरब में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के बाद बालोतरा जिले के मेघवालों की ढाणी निवासी 19 वर्षीय भारतीय नागरिक दिवंगत रमेश कुमार मेघवाल की दिवंगत देह को आखिरकार 36 दिन बाद वतन की मिट्टी नसीब हुई। गुरुवार दोपहर सऊदी अरब से उनकी पार्थिव देह जयपुर एयरपोर्ट पहुंची, जहां से आगे की औपचारिकताएं पूरी की गईं।
एयरपोर्ट पर परिजनों की मौजूदगी और सुपुर्दगी
जयपुर एयरपोर्ट पर राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा, रमेश कुमार के भाई गैनाराम मेघवाल, परिवार के सदस्य मोटाराम और सुखदेव तथा बूंदी से आए प्रवासी सहायता टीम के सदस्य कुणाल पारीक, अमन राठौर और कृष्णमुरारी शर्मा उपस्थित रहे। गुरुवार सायं आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिवंगत देह परिजनों को सौंप दी गई।
बालोतरा के लिए एंबुलेंस से रवाना
सुपुर्दगी के बाद सांसद उम्मेदाराम मेघवाल की ओर से उपलब्ध करवाई गई एंबुलेंस में दिवंगत देह को लेकर परिजन बालोतरा के लिए रवाना हो गए। इसी दिन राजस्थान हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई भी हुई, जिसमें राज्य सरकार को जयपुर एयरपोर्ट से रमेश कुमार के निवास तक पार्थिव देह पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
पोस्टमार्टम को लेकर परिजनों का संदेह
परिजनों ने सऊदी अरब में रमेश कुमार की मृत्यु को लेकर संदेह जताया है। उनका कहना है कि मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और 36 दिन बाद देह भारत भेजे जाने से शंकाएं और गहरी हो गई हैं। इसी कारण परिजन अपने गृह जिले में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।
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परिवार ने जताई प्रताड़ना की आशंका
रमेश कुमार के भाई गैनाराम ने बताया कि परिवार को आशंका है कि उनके भाई की सऊदी अरब में हत्या की गई और उसे वहां प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी आशंका के चलते वे अंतिम संस्कार से पहले विस्तृत जांच चाहते हैं।
रमेश कुमार मेघवाल की 13 नवंबर 2025 को सऊदी अरब में मृत्यु हो गई थी। वे 11 अक्तूबर को परिवार के पालन-पोषण के लिए सऊदी अरब गए थे। 11 दिसंबर को उनकी मां तीजू देवी की याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने सऊदी अरब दूतावास और सऊदी सरकार को नोटिस जारी किया, जिसके बाद दो दिनों के भीतर दिवंगत देह भारतीय दूतावास को सौंप दी गई।
चर्मेश शर्मा की भूमिका रही अहम
दिवंगत देह के भारत नहीं पहुंचने पर परिजनों ने विदेश में संकटग्रस्त भारतीयों की सहायता के लिए कार्य करने वाले बूंदी के कांग्रेस नेता और राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा से संपर्क किया। शर्मा ने राष्ट्रपति सचिवालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और विदेश मंत्रालय में शिकायत दर्ज करवाई। राष्ट्रपति सचिवालय के निर्देशों और भारतीय दूतावास के प्रयासों के बाद अंततः देह को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हुई।
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