Agriculture News: किसान आदेश्वर झा पहले तंबाकू की खेती करते थे. अब मेडिसिनल प्लांट यानी चिया सीड की खेती शुरू कर दी है. फिलहाल वे करीब 12 कट्ठा जमीन में चिया सीड की खेती कर रहे हैं, जिसमें उन्हें अच्छी पैदावार मिल रही है.
सही दाम नहीं मिलने और लगातार बढ़ते खर्च के कारण किसान अब वैकल्पिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं. समस्तीपुर जिले में भी कुछ किसान पारंपरिक खेती छोड़कर नई और लाभकारी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में सुधार हो रहा है.
तंबाकू छोड़ मेडिसिनल प्लांट की ओर बढ़े आदेश्वर झा
समस्तीपुर जिले के मुरगा गांव निवासी 65 वर्षीय किसान आदेश्वर झा इसकी एक मिसाल बनकर सामने आए हैं. वे वर्षों से अपने परिवार के साथ बड़े पैमाने पर तंबाकू की खेती करते आ रहे थे.बचपन से उन्होंने अपने खेतों में तंबाकू की फसल ही देखी, लेकिन बीते दो वर्षों से तंबाकू का बाजार लगातार गिरने लगा. उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण उन्होंने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया. आदेश्वर झा ने उसी खेत में, जहां पहले तंबाकू की खेती होती थी, अब मेडिसिनल प्लांट यानी चिया सीड की खेती शुरू कर दी है. फिलहाल वे करीब 12 कट्ठा जमीन में चिया सीड की खेती कर रहे हैं, जिसमें उन्हें अच्छी पैदावार मिल रही है.
कम लागत, बेहतर बाजार और मुनाफे की नई राह
किसान आदेश्वर झा बताते हैं कि चिया सीड की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम है और बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इस कारण फसल बेचने में भी कोई खास परेशानी नहीं होती. उनका कहना है कि यदि एक बीघा जमीन में वैज्ञानिक तरीके से चिया सीड की खेती की जाए, तो 5 से 6 लाख रुपये तक का उत्पादन संभव है.यह खेती न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि भविष्य के लिए एक सुरक्षित विकल्प भी साबित हो रही है. आदेश्वर झा जैसे किसानों का यह बदलाव अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है.साफ है कि बदलते जमाने के साथ अगर किसान खेती के नए तरीकों को अपनाएं, तो पारंपरिक खेती से निकलकर वे बेहतर मुनाफा और आर्थिक मजबूती हासिल कर सकते हैं.
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