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बकरा विकास योजना ग्रामीण गरीबों और किसानों के लिए आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन रही है. पहले इस योजना में 4 बकरी और 1 बकरा 90 प्रतिशत और 75 प्रतिशत अनुदान पर दिए जाते थे. अब इसे बढ़ाकर 8 बकरी और 2 बकरा कर दिया गया है. यानी लाभुकों को कुल 10 पशु दिए जा रहे है.
एससी, एसटी और स्थायी निवास अनिवार्य
जिला पशुपालन पदाधिकारी प्रभाकर सिन्हा ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए राज्य का स्थायी निवासी होना जरूरी है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विधवा और निसंतान लाभुकों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. अन्य पात्र श्रेणी के लाभुकों को 75 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिलता है. चयन प्रक्रिया ग्राम सभा के माध्यम से होती है, जहां अनुशंसा के बाद चयनित सूची तैयार की जाती है. प्रत्येक प्रखंड में लक्ष्य के अनुसार लाभुकों का चयन किया जाता है.
पलामू को मिला 634 का लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2025-26 में पलामू जिले को 634 लाभुकों का लक्ष्य मिला है. अब तक 475 लाभुकों का चयन कर उन्हें योजना का लाभ दिया जा चुका है. जिले के 21 प्रखंडों में लक्ष्य के अनुसार आवंटन किया गया है. ग्राम सभा की अनुशंसा के बाद चयनित लाभुकों को योजना से जोड़ा जा रहा है.
4747 रुपए लगाएं, 10 बकरा पाएं
इस योजना की कुल लागत 47,467 रुपए निर्धारित है. 90 प्रतिशत अनुदान श्रेणी में सरकार 42,720 रुपए देती है और लाभुक को मात्र 4,747 रुपए अपने खाते में जमा करने होते हैं. वहीं 75 प्रतिशत अनुदान श्रेणी में सरकार 35,600 रुपए देती है और लाभुक को 11,867 रुपए का अंशदान करना पड़ता है. इसके बदले 8 बकरी और 2 बकरा दिए जाते हैं.साल भर में एटीएम जैसी आय. यदि एक बकरी साल में एक बच्चा भी देती है तो संख्या तेजी से बढ़ती है. एक साल में 10 से 20 और दो से तीन साल में 50 से 60 तक बकरियां हो सकती हैं. यही कारण है कि बकरा विकास योजना किसानों के लिए एटीएम की तरह साबित हो रही है. सरकार की पूंजी और लाभुक की छोटी भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिल रहा है.
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