बिना जमीन और बिना पेड़ के कैसे शुरू करें खेती?
शक्ति के अनुसार, लाह की खेती के लिए सबसे पहले कुसुम, बेर और पलाश के पेड़ों की आवश्यकता होती है. लेकिन अगर आपके पास खुद के पेड़ नहीं हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं है। शक्ति एक स्मार्ट ‘लीज मॉडल’ का सुझाव देते हैं:
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग: खूंटी, नामकुम और रांची के ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे किसान हैं जिनके पास एकड़ में ये पेड़ लगे हैं, लेकिन वे इनका उपयोग नहीं जानते.
मुनाफे की हिस्सेदारी: आप इन पेड़ों को 2-3 साल के लीज पर ले सकते हैं। शक्ति का सुझाव है कि पेड़ के मालिक के साथ मुनाफे का एक हिस्सा (जैसे 30-40%) साझा करने का लिखित अनुबंध करें. इससे ग्रामीणों का भरोसा बढ़ता है और आपको बिना निवेश के बड़े पैमाने पर पेड़ मिल जाते हैं.
एक पेड़ से लाखों की कमाई
लाह की खेती की उत्पादकता और बाजार मूल्य दोनों ही बहुत आकर्षक हैं:
पैदावार: एक स्वस्थ और बड़े पेड़ से सीजन में लगभग 10 से 15 क्विंटल तक लाह प्राप्त किया जा सकता है.
बाजार भाव: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में लाह की कीमत ₹800 से ₹900 प्रति किलोग्राम तक रहती है.
समय: इस मौसम में लाह की खेती शुरू करना सबसे उपयुक्त है. मात्र 5 महीनों में लाह की कीट पूरी टहनी को कवर कर लेती है और फसल तैयार हो जाती है.
मार्केटिंग की चिंता नहीं: एशियन और बर्जर पेंट्स हैं बड़े खरीदार
शक्ति बताते हैं कि लाह एक प्राकृतिक रेजिन है. आजकल दुनिया भर में प्राकृतिक रंगों और कोटिंग्स की मांग बढ़ रही है। एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स जैसी दिग्गज कंपनियां बड़ी मात्रा में प्राकृतिक लाह की तलाश में रहती हैं. अगर आप गुणवत्तापूर्ण लाह का उत्पादन करते हैं, तो कंपनियां सीधे खेत पर आकर आपसे कॉन्ट्रैक्ट कर लेंगी.
शक्ति के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती गांव वालों को समझाना और उनके साथ समन्वय बिठाना है. इसके लिए आपको अपना व्यवहार कुशल रखना होगा. यदि आप इस तकनीकी खेती की बारीकियां सीखना चाहते हैं, तो रांची स्थित ‘भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान’ (लाह अनुसंधान केंद्र) में 3 से 5 दिनों की विशेष ट्रेनिंग ले सकते हैं.
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