संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को तेज करने के लिए संसद के ग्रीष्मकाल सत्र के पहले दिन यानी 9 मार्च को जंतर-मंतर पर किसान-मजदूर संसद चलाने का एलान किया है। 10 मार्च से पंजाब के बरनाला में किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। वहीं से जलियांवाला बाग हत्याकांड की बरसी 13 अप्रैल तक अलग-अलग राज्यों में होने वाली महापंचायतों का एलान किया जाएगा। इन महापंचायतों में किसानों को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और सरकार की अन्य कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों के खतरों को समझाया जाएगा और भविष्य के लंबे संघर्ष की तैयारी की जाएगी।
मंगलवार को जाट धर्मशाला में राष्ट्रीय परिषद की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें एसकेएम ने निर्णय लिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का दबाव डालने के साथ अपनी लंबित मांगे पूरी करने के लिए एसकेएम से जुड़े किसान संगठन अपने स्वतंत्र आंदोलन के साथ संयुक्त रूप से आंदोलन को तेज करेंगे। 23 मार्च शहीद दिवस को देशभर में साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा जिसके लिए विस्तृत कार्यक्रम राज्य स्तर पर तय किए जाएंगे।
एसकेएम बुधवार से ही 9 मार्च तक अपने आंदोलन को गांव तक पहुंचाने के लिए गांवों में जाकर जनसभाओं का आयोजन करेगा। इन आयोजनों में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने, प्रधानमंत्री को राष्ट्रविरोधी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश देने और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को गेहूं और धान किसानों के बोनस को समाप्त करने वाले डीओ पत्र को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की जाएगी। राष्ट्रपति के नाम खुले पत्र लिखकर आयोजन स्थल से गांव के डाकघरों तक जुलूस निकालकर भेजें जाएंगे।
वहीं 27 फरवरी या उसके बाद एसकेएम के प्रतिनिधिमंडल संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलकर केंद्र सरकार की ओर से सत्ता के केंद्रीकरण का विरोध करने, राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने, संसद से जीएसटी अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्ति बहाल करने और विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी वर्तमान में 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता सात सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की जिसमें जोगिंदर सिंह उग्राहां, राकेश टिकैत, डॉ. अशोक धवले, आशीष मित्तल, जगमोहन सिंह, राजन क्षीरसागर और जोगिंदर सिंह नैन शामिल रहे। पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और केरल सहित नौ राज्यों से 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया।
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