Success story in Saras Mela Faridabad : अरुण ने अपने साथ गांव की महिलाओं को भी जोड़ा. आज करीब 70 महिलाएं उनके साथ काम कर रही हैं. कोई उनके घर आकर काम करती हैं तो कोई अपने घर से ही सामान बनाती हैं. इससे महिलाएं घर-परिवार संभालते हुए कमाई भी कर रही हैं. 2017 में अरुण के काम को असली पहचान मिली. लोगों ने उनके बनाए सामान को पसंद करना शुरू कर दिया. मेलों में बढ़िया बिक्री होने लगी.
कैसे आया टर्निंग पॉइंट
साल 2005 अरुण के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. एक बार जब वो गांव लौटे तो वहां उन्हें घास और खजूर के पत्तों से बनने वाले पारंपरिक हस्तशिल्प के बारे में पता चला. बस, यहीं से उन्होंने ये कला सीखने की ठान ली. शुरुआत आसान नहीं रही. काम बेहद बारीक और मेहनत वाला था, पैसे भी कम मिलते थे. लेकिन अरुण ने हार नहीं मानी. घर से ही छोटी शुरुआत की. आज अरुण घास और खजूर के पत्तों से कई तरह के खूबसूरत और काम आने वाले सामान बनाते हैं, जैसे लेडीज बैग, पर्स, ट्रे, फ्लावर पॉट, कटोरी, बास्केट, चटाई, टेबल मैट, डस्टबिन, ब्रेड ट्रे, पेन स्टैंड वगैरह. खजूर के पत्ते और सवाई ग्रास के धागे से बनते हैं. सवाई ग्रास की कीमत करीब 40 रुपये किलो पड़ती है और यही घास विदेशों तक भी जाती है.
ध्यान और धीरज का काम
अरुण बताते हैं कि ये काम बहुत ध्यान और धीरज का है. लगातार बैठकर नहीं किया जा सकता वरना आंखों और हाथों पर ज़्यादा जोर पड़ता है. बड़ा आइटम बनाना हो तो तीन-चार दिन लग जाते हैं. एक लेडीज बैग तैयार करने में दो दिन लगते हैं जिसकी कीमत 350 रुपये है. डाइनिंग टेबल मैट का सेट 750 रुपये में बिकता है. बेड की चटाई 1000 रुपये से शुरू होती है. पर्स 200 रुपये का है फ्रूट ट्रे 350 की. उनके प्रोडक्ट 30 रुपये से लेकर 2200 रुपये तक के हैं. 2017 में अरुण के काम को असली पहचान मिली. लोगों ने उनके बनाए सामान को पसंद करना शुरू कर दिया. मेलों में बढ़िया बिक्री होने लगी. सरकार से शुरू में 1000 रुपये का इनाम मिला जिससे हौसला बढ़ा. बाद में दो लाख रुपये से ज्यादा का लोन भी मिला जिससे अरुण ने काम और आगे बढ़ाया.
कितना कमा रहे महीना
अब 53 साल के हो चुके अरुण कुमार फरीदाबाद के सरस मेले में अपने सामान बेच रहे हैं. कंपनी की नौकरी के मुकाबले अब उनकी आमदनी कहीं ज्यादा है. हर महीने एक लाख रुपये से भी ऊपर कमा लेते हैं. उनकी पत्नी हमेशा साथ देती हैं. दो बच्चे हैं. बेटी की शादी हो चुकी है और बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग पढ़ रहा है. अरुण की कहानी उन सबके लिए मिसाल है जो अपने हुनर और मेहनत से जिंदगी बदलना चाहते हैं.
About the Author
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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