लोगों के दस्तावेजों की जांच करती पुलिस।
फरीदाबाद जिले में भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़े तनाव का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। इसी के चलते फरीदाबाद पुलिस ने जिले में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। बता दे कि पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर कई
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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पिछले चार महीनों में 85 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजा गया है। डिपोर्ट किए गए लोगों में पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। इससे पहले मई 2025 में पलवल और नूंह जिले की पुलिस ने महज नौ दिनों के भीतर 106 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया था।
फरीदाबाद में यह अभियान लगातार जारी है और आगे भी सख्ती बढ़ाए जाने की संभावना है।
हिरासत से बॉर्डर तक पूरी प्रक्रिया
पुलिस टीमों द्वारा संदिग्ध विदेशी नागरिकों को पहले हिरासत में लिया जाता है और फिर उन्हें शेल्टर होम भेजा जाता है। वहां उनकी पहचान, दस्तावेज और पारिवारिक जानकारी की जांच की जाती है। सत्यापन पूरा होने के बाद पूरी रिपोर्ट सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भेजी जाती है।
कूड़ा प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष नजर
वहीं मंजूरी मिलने पर पुलिस उन्हें सरकारी वाहनों के माध्यम से बॉर्डर तक ले जाती है, जहां से डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी की जाती है।जांच के दौरान सामने आया है कि अधिकतर बांग्लादेशी नागरिक कूड़ा छांटने और सफाई से जुड़े कामों में लगे हुए थे।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी देखी गई
कुछ लोग Eco Green की गाड़ियों और डंपिंग यार्ड में काम करते पाए गए। खराब और अस्वच्छ हालात में रहने के कारण कई लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी देखी गई हैं।झुग्गी बस्तियां और अवैध कॉलोनियां रडार पर सूत्रों के मुताबिक फरीदाबाद में 50 झुग्गी बस्तियां और दर्जनों अवैध कॉलोनियां मौजूद हैं।
जारी रहेगा अभियान
पुलिस इन इलाकों में स्थानीय खुफिया तंत्र और मुखबिरों की मदद से लगातार छापेमारी और जांच अभियान चला रही है, ताकि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान की जा सके।पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह कहना है कि यह अभियान कानून और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
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