यह घटना तब हुई, जब महिला अपने दोस्त के घर जाने के लिए सड़क किनारे वाहन का इंतजार कर रही थी. इसी दौरान एक एंबुलेंस वहां रुकी. महिला ने इसे सुरक्षित साधन समझकर एंबुलेंस में बैठना सही समझा, लेकिन उसे क्या पता था कि यही भरोसा उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा बन जाएगा. एंबुलेंस चालक और उसके साथी ने चलती गाड़ी में महिला के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया. बाद में उसे सड़क पर फेंक दिया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई. किसी तरह महिला को अस्पताल पहुंचाया गया. पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन इसके बाद जो हालात बने, उन्होंने परिवार की पीड़ा और बढ़ा दी है.
परिवार का अस्पताल पर आरोप
पीड़िता की बहन का कहना है कि उन्हें अब तक अपनी बहन से ढंग से मिलने तक नहीं दिया गया है. जब भी वह अस्पताल जाती हैं, तो या तो उन्हें बाहर ही रोक दिया जाता है या फिर बताया जाता है कि मरीज ठीक है, मिलने की जरूरत नहीं है. बहन का आरोप है कि जब वह मिलने की कोशिश करती हैं, तो पीड़िता को नींद का इंजेक्शन लगा दिया जाता है, जिससे कोई बातचीत नहीं हो पाती है. कमरे के चारों तरफ पर्दे लगा दिए जाते हैं और परिवार को बाहर ही खड़ा रखा जाता है.
बहन का कहना है कि ऐसे में उन्हें यह तक नहीं पता कि उनकी बहन की हालत वास्तव में कैसी है. परिवार का यह भी आरोप है कि इलाज के नाम पर लगातार पैसे मांगे जा रहे हैं. अब तक करीब 50 हजार रुपये जमा कराए जा चुके हैं और 28 हजार रुपए और मांग रहे हैं. परिवार पहले से ही मानसिक सदमे में है और ऊपर से आर्थिक दबाव ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं.
कांग्रेस नेता शालिनी चोपड़ा पहुंचीं अस्पताल
इस मामले को लेकर कांग्रेस की नेता शालिनी चोपड़ा भी अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना है कि जब पीड़िता के अपने लोग उससे मिलना चाहते हैं तो उन्हें क्यों रोका जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पुलिस समय रहते सख्ती दिखाती तो यह घटना शायद टाली जा सकती थी. शालिनी चोपड़ा ने साफ कहा कि अगर पीड़िता के साथ कुछ भी अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और संबंधित थाने के अधिकारियों की होगी. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कोशिश है कि पीड़िता को इस निजी अस्पताल से निकालकर बीके अस्पताल ले जाया जाए.
दूसरे अस्पताल में शिफ्ट की मांग
वहीं कांग्रेस नेता रिंकू चंदीला ने भी अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने कहा कि न सिर्फ आम लोग, बल्कि परिवार वालों को भी पीड़िता से मिलने नहीं दिया जा रहा. जैसे ही वे अस्पताल पहुंचे, वहां सख्ती और बढ़ा दी गई. उनका कहना है कि अगर इलाज में कोई सुधार नहीं हो रहा, तो पीड़िता को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर पीड़िता की हालत क्या है, यह बात परिवार से क्यों छिपाई जा रही है.
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक तरफ पुलिस सुरक्षा के नाम पर कड़ी घेराबंदी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता का परिवार खुद को बिल्कुल असहाय महसूस कर रहा है. जिन लोगों को इस मुश्किल समय में साथ होना चाहिए था, वही परिवार से दूरी बनाए हुए हैं. अब सभी की नजरें पुलिस कमिश्नर पर टिकी हैं, जिनसे मिलने के बाद ही यह तय होगा कि पीड़िता को न्याय और सही इलाज मिल पाएगा या नहीं.
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