प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को दिल्ली ब्लास्ट केस से जुड़ी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की करीब 140 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की हैं। साथ ही अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है। ED की ओर से अटैच की गई संपत्तियों में फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में 54 एकड़ जमीन, यूनिवर्सिटी की इमारत, स्कूलों और विभागों की इमारतें और हॉस्टल शामिल हैं। ED ने इन्हें अपराध की आय की श्रेणी में रखा है। ये कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा था। यूनिवर्सिटी के डॉक्टर उमर उन नबी ने 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास चलती हुई कार में धमाका किया था, इसमें 15 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच में भी यूनिवर्सिटी का नाम आया था। इस मामले में NIA और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन सईद समेत 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। ED ने कहा था- झूठी मान्यता से आय अर्जित की
ED ने 18 नवंबर को अल-फलाह ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर रेड की थी। 12 घंटे चले सर्च के बाद ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान ED ने कोर्ट में बताया था कि यूनिवर्सिटी और उसके नियंत्रण वाले ट्रस्ट ने झूठी मान्यता और पहचान के दावे कर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को धोखे में रखा। इस तरह 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की। 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर पाईं गईं
ED को जांच के दौरान कई अनियमितताएं मिलीं, जिसमें 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड पाई गईं। कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर है। साथ ही एम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। ED ने यह भी कहा था कि अगर कोर्ट अस्थायी जब्ती को सही ठहराता है, तो सरकार एक अधिकारी को यूनिवर्सिटी का कामकाज संभालने के लिए नियुक्त कर सकती है। इससे कानूनी कार्रवाई चलने के बावजूद स्टूडेंट्स की पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आएगी। हरियाणा सरकार भी यूनिवर्सिटी पर कस सकती है शिकंजा
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर हरियाणा सरकार शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। 22 दिसंबर को विधानसभा में हरियाणा निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2025 पास हो चुका है। बिल में सरकार ने की बदलाव किए हैं। इस बिल में कहा गया है कि अगर किसी भी यूनिवर्सिटी में नेशनल सिक्योरिटी, देश की अखंडता और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में चूक होती है, तो सरकार किसी भी यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। सरकार यूनिवर्सिटी के प्रशासन को भंग करके अपने प्रशासन को नियुक्त कर सकती है और उसका कामकाज पूरी तरह से अपने हाथ में ले सकती है। पिछले बिल में इस तरह का कोई प्रावधान नही था, इसलिए सुरक्षा को लेकर ये नए प्रावधान किए गए हैं। यूनिवर्सिटी व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल का खुलासा 18-19 अक्टूबर 2025 की दरमियानी रात को हुआ, जब प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के पोस्टर श्रीनगर शहर के बाहर दीवारों पर दिखाई दिए। इन पोस्टरों में घाटी में पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमलों की चेतावनी दी गई थी। इसे गंभीर मामला मानते हुए श्रीनगर के एसएसपी जीवी सुंदीप चक्रवर्ती ने जांच के लिए कई टीमें बनाईं। गिरफ्तार आरोपियों के बयानों को जोड़ने के बाद, जांच श्रीनगर पुलिस को हरियाणा के फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक ले गई, जहां दो डॉक्टरों – दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के कोइल के रहने वाले गनी और लखनऊ के शाहीन सईद को गिरफ्तार किया गया। इनके पास भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी ज़ब्त किया गया, जिसमें 2,900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल था।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.