पिथौरागढ़। लोगों का विरोध और जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप भी आखिरकार पिथौरागढ़ से रोडवेज बस का लोहाघाट भेजा जाना नहीं रोक सका। लोहाघाट डिपो से भेजा गया चालक एक बस लेकर चला गया। दूसरी बस के भी शनिवार यानि आज लोहाघाट जाने की संभावना है।
दरअसल पिथौरागढ़ डिपो को कुछ दिन पूर्व छह नई बसें मिली थीं। बीते दिनों क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय ने दो बसों को लोहाघाट भेजने का फरमान जारी किया। जनप्रतिनिधियों और जिले के लोगों ने इसका विरोध किया। बाकायदा डीडीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल और पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर ने इस मामले पर अधिकारियों से बात कर बसों को लोहाघाट भेजने पर आपत्ति जताई। विधायक महर ने डीएम से मुलाकात कर इस मामले को उठाया। भाजपा के कुछ नेताओं ने भी इस मामले में निगम अधिकारियों से बात कर इस कदम पर ऐतराज जताया।
सभी आपत्तियां और ऐतराज धरे रह गए और कोई भी रोडवेज के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से मिले आदेश को नहीं पलट सका। नतीजतन एक बस लोहाघाट भेज दी गई है जबकि दूसरी बस के जल्द पिथौरागढ़ से जाने की संभावना है। नई बसों को लोहाघाट भेजने के बाद फिर से पिथौरागढ़ डिपो को पुरानी खटारा बसों को दौड़ाना और यात्रियों को इनमें सफर करना होगा।
पिथौरागढ़ डिपो क्यों बन रहा निशाना
नई बसों को पिथौरागढ़ डिपो से वापस भेजे जाने का निर्णय किसी के गले से नहीं उतर रहा है। इस फैसले से डिपो के कर्मियों में भी आक्रोश है। चर्चा है कि टेंपो ट्रैवलर अन्य जगह रिजेक्ट होने के ही पिथौरागढ़ डिपो भेजी गई हैं जबकि इनके संचालन के लिए चालकों की व्यवस्था नहीं की गई। चर्चा यह है कि चालकों की कमी का बहाना बनाते हुए निदेशालय ने टेंपो ट्रैवलर पिथौरागढ़ डिपो पर थोपकर नई बड़ी बसों को लोहाघाट भेजने का निर्णय लिया है। यदि चालकों व अन्य कार्मिकों की कमी है तो निगम उसकी भरपाई क्यों नहीं कर रहा। पहले से बसों की भारी कमी झेल रहा पिथौरागढ़ डिपो को निशाना क्यों बनाया जा रहा है, यह सवाल चर्चाओं में है। हैरानी की बात है कि पिथौरागढ़ डिपो के पास पर्याप्त बसें न होने से डीडीहाट, धारचूला, बेड़ीनाग, राईआगर और थल क्षेत्र से देहरादून के लिए सीधी बस सेवा संचालित नहीं हो सकी है।
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