जसूर (कांगड़ा)। लगभग तीन माह से बारिश न होने के कारण वातावरण में अत्यधिक सूखापन और धूल प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
कड़ाके की ठंड के साथ यह शुष्क मौसम लोगों की श्वसन प्रणाली, त्वचा और आंखों पर सीधा असर डाल रहा है। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सुलियाली के प्रभारी डॉ. सन्नी जरयाल ने स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है। उनके मुताबिक बारिश के अभाव में हवा में मौजूद सूक्ष्म धूल कण (पीएम 2.5) नीचे नहीं बैठ पा रहे हैं। इससे सर्दी-खांसी, दमा, साइनस, एलर्जी, आंखों में जलन, ड्राई-आई, हाई ब्लड प्रेशर और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
ऐसे मौसम में मास्क के नियमित प्रयोग, पर्याप्त हाइड्रेशन और ठंडी-धूल भरी हवा से बचाव के लिए बेहद आवश्यक है। त्वचा सुरक्षा के लिए तेल मालिश, माइल्ड साबुन, नहाने के तुरंत बाद मॉइस्चराइजर, होंठ-एड़ियों की देखभाल, संतुलित आहार, सीमित धूप से त्वचा को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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