राजस्थान के कोटा जिले की रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र में एक समारोह के दौरान गौ-संवर्धन गौ-चारण परंपरा का भव्य शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही। समारोह को संबोधित करते हुए रामस्नेही संप्रदाय के जगत गुरु 1008 स्वामी रामदयाल जी महाराज ने गौमाता के संरक्षण और संवर्धन को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
संकल्प से संरक्षण पर जोर
स्वामी रामदयाल जी महाराज ने कहा कि गौमाता का संवर्धन संविधान से नहीं, बल्कि संकल्प से होगा। उन्होंने कहा कि सरकार गौमाता की सुरक्षा के लिए कानून बनाती है, लेकिन केवल कानून से गौमाता की सुरक्षा संभव नहीं हो पा रही है। उनके अनुसार जब सभी हिन्दू मिलकर संकल्प लेंगे, तभी गौमाता की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
मंत्री मदन दिलावर का संबोधन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने गाय और भैंस के दूध को लेकर तुलनात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो बच्चे गाय का दूध पीते हैं, वे बुद्धिमान और स्फूर्ति शाली बनते हैं, जबकि जो भैंस का दूध पीते हैं उनमें आलस देखा गया है। मंत्री ने देशी अंदाज में उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भैंसों के झुंड में नवजात भैंस के बच्चे को छोड़ा जाए तो उसे अपनी मां को पहचानने में समय लगता है, जबकि गाय का बच्चा सीधे अपनी मां के पास पहुंचकर दूध पीता है। उन्होंने इसे गाय के बच्चे के ज्ञानवान और बुद्धिमान होने से जोड़ा।
गांव ग्वाला नियुक्ति की योजना
मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि 70 गायों पर एक गांव ग्वाला नियुक्त किया जाएगा। यदि संख्या दोगुनी होगी तो दो और तिगुनी होने पर तीन गांव ग्वाल नियुक्त किए जाएंगे। प्रत्येक गांव ग्वाल को दस हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था का संचालन भामाशाहों के सहयोग से किया जाएगा।
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