कोडरमा की दीप्ति कुमारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद पहले ही प्रयास में 99.52 परसेंटाइल के साथ UGC NET क्वालीफाई कर लिया. हार्डवेयर दुकान में हेल्पर की बेटी ने होम ट्यूशन और व्यस्त दिनचर्या के बीच केवल 3 घंटे की नियमित पढ़ाई और मॉक टेस्ट के दम पर यह बड़ी सफलता हासिल की है.
12वीं में पढ़ाई के दौरान प्रोफेसर बनने का देखा था सपना
दीप्ति के पिता अभिमन्यु कुमार शर्मा एक हार्डवेयर दुकान में हेल्पर के रूप में काम करते हैं. जबकि उनकी मां विभा देवी गृहणी हैं. सीमित आय और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद दीप्ति का हौसला हमेशा ऊंचा रहा. विशेष बातचीत में दीप्ति ने बताया कि 12वीं कक्षा के दौरान ही उन्होंने प्रोफेसर बनने का सपना देखा था. इसी सपने को पूरा करने की जिज्ञासा ने उन्हें यूजीसी नेट परीक्षा के बारे में जानकारी जुटाने के लिए प्रेरित किया.
पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र-मॉक टेस्ट महत्वपूर्ण
दीप्ति ने बताया कि उनका लक्ष्य जेआरएफ क्वालीफाई करने का था. हालांकि पहले प्रयास में उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी के लिए सफलता मिली है. जिसे वह अपने संघर्ष की बड़ी उपलब्धि मानती हैं. उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों और मॉक टेस्ट को अपनी रणनीति का मुख्य हिस्सा बनाया. हालांकि परीक्षा से एक दिन पहले दिए गए मॉक टेस्ट में कम अंक आने से उनका आत्मविश्वास डगमगा गया था. लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और पूरे मनोबल के साथ परीक्षा दी.
पढ़ाई के बीच में ब्रेक से बनी रहती है एकाग्रता
उन्होंने बताया कि तैयारी के लिए उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और यूट्यूब पर उपलब्ध शैक्षणिक वीडियो का सही और सीमित उपयोग किया. फिलहाल वह बीएड की पढ़ाई कर रही हैं और साथ ही बच्चों को होम ट्यूशन भी देती हैं. व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्हें दिन में अपनी पढ़ाई के लिए केवल तीन घंटे ही मिल पाते थे. उन्होंने बताया कि सफलता के लिए पढ़ाई का सही तरीका बेहद जरूरी है. वह लगातार दो घंटे पढ़ाई करने, फिर दस मिनट का ब्रेक लेने और दोबारा दो घंटे पढ़ने की रणनीति अपनाती थीं. जिससे एकाग्रता बनी रहती थी. उन्होंने बताया कि जिन्हें बार-बार असफलता मिल रही है. वे कम से कम पिछले छह वर्षों के प्रश्न पत्रों का गहन अभ्यास करें और खुद पर भरोसा बनाए रखें.
झारखंड में रिसर्च के लिए बढ़ने चाहिए विश्वविद्यालय
उन्होंने कहा कि यूजीसी नेट क्वालीफाई करने के लिए बचपन से मेधावी होना जरूरी नहीं है. वह खुद एक सामान्य छात्रा रही हैं. लेकिन नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मविश्वास ने उन्हें सफलता दिलाई. साथ ही उन्होंने झारखंड में रिसर्च की सीमित सुविधाओं पर चिंता जताते हुए सरकार से मांग की कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी शोध की बेहतर व्यवस्था हो, ताकि झारखंड के छात्रों को रिसर्च के लिए बाहर न जाना पड़े.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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