स्थानीय एटीएम (एग्रीकल्चर टेक्निकल मैनेजर) सपन मंडल के अनुसार यह योजना केवल पाइप लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार इंस्टॉलेशन, तकनीकी सहायता और किसानों की ट्रेनिंग भी दे रही है, ताकि किसान आधुनिक खेती को सही तरीके से अपना सकें.
एक बटन से पूरे खेत में सिंचाई
ड्रिप इरिगेशन सिस्टम पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित है. इसमें मुख्य पाइप लाइन, सब-पाइप, ड्रिपर, कंट्रोल वाल्व और एक विशेष फर्टिलाइजर टैंक (वेंटुरी सिस्टम) लगाया जाता है. किसान इस टैंक के माध्यम से खाद को पानी में घोलकर सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचा सकते हैं. इससे खाद की बचत होती है और फसल की बढ़वार तेज होती है.
सिस्टम में कंट्रोलर भी लगा होता है, जिससे किसान तय कर सकता है कि कितनी देर और कितनी दूरी तक पानी देना है. एक बटन दबाते ही पूरे खेत में समान रूप से सिंचाई हो जाती है और जलभराव की समस्या भी नहीं होती.
1 लाख की मशीन 10 हजार में
इस योजना के तहत ड्रिप इरिगेशन सिस्टम की सामान्य लागत लगभग 60 हजार से 1.20 लाख रुपये प्रति एकड़ तक आती है, जो फसल और क्षेत्र के अनुसार बदलती है. लेकिन 90 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद किसान को केवल 5 से 10 हजार रुपये के आसपास ही खर्च करना पड़ता है.
सब्जी, फल, फूल, टमाटर, मिर्च, गोभी, तरबूज, आम, अमरूद, पपीता जैसी बागवानी फसलों के लिए यह प्रणाली काफी लाभकारी मानी जा रही है. इससे 40 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत और 20 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है.
इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं. इसमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, भूमि रसीद या खतियान/एलपीसी, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो और किसान रजिस्ट्रेशन (Jharkhand Farmer Registration) अनिवार्य है.
आवेदन प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) कार्यालय, प्रज्ञा केंद्र (सीएससी) या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है. आवेदन स्वीकृत होने के बाद विभाग द्वारा चयनित कंपनी खेत पर आकर सिस्टम इंस्टॉल करती है और किसानों को इसे चलाने की ट्रेनिंग भी देती है.
अधिक से अधिक किसान उठाएं फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा आधारित राज्य झारखंड में यह योजना किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. कम पानी में अधिक उत्पादन और कम मेहनत के कारण किसान पारंपरिक खेती से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक छोटे और सीमांत किसान इस योजना से जुड़कर कम लागत और अधिक मुनाफे वाली खेती अपनाएं और आत्मनिर्भर बनें.
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