मोहखेड़ में चिकित्सा सेवा और मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक डॉक्टर ने समय रहते एक मासूम बच्ची की जान बचा ली। बच्ची गंभीर श्वसन संकट में थी और उसका ऑक्सीजन स्तर गिरकर 65 प्रतिशत तक पहुंच गया था। हालत इतनी नाजुक थी कि परिजनों की सांसें थम सी गई थीं।
जानकारी के अनुसार, बच्ची को अचानक सांस लेने में तकलीफ शुरू हुई। स्थिति बिगड़ती देख घबराए परिजन उसे तुरंत नजदीकी क्लीनिक लेकर पहुंचे। उस समय बच्ची की सांसें बेहद धीमी हो चुकी थीं और शरीर में हरकत भी कम हो गई थी। क्लीनिक पहुंचते ही वहां मौजूद स्टाफ और परिजनों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए क्लीनिक संचालक डॉ. सोयल खान ने बिना देर किए उपचार शुरू किया। जांच के दौरान बच्ची का ऑक्सीजन स्तर बेहद कम पाया गया। हालात को देखते हुए उन्होंने तत्काल आपात प्रक्रिया अपनाई और सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया।
करीब कुछ मिनटों तक चले प्रयासों के दौरान क्लीनिक में सन्नाटा पसरा रहा। परिजन दुआएं कर रहे थे और हर पल भारी लग रहा था। इसी बीच अचानक बच्ची ने रोना शुरू कर दिया। रोने की आवाज सुनते ही वहां मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली। यह क्षण परिजनों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।
स्थिति सामान्य होने के बाद बच्ची को निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर दिया गया सीपीआर उसके लिए जीवनदायी साबित हुआ। यदि कुछ मिनट और देरी हो जाती तो परिणाम गंभीर हो सकते थे। परिजनों ने भावुक होकर डॉ. खान का आभार जताया। उनका कहना है कि सही समय पर मिले उपचार ने उनकी दुनिया उजड़ने से बचा लिया।
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विशेषज्ञों के अनुसार, श्वसन अवरोध या अचानक ऑक्सीजन स्तर गिरने की स्थिति में शुरुआती मिनट बेहद अहम होते हैं। ऐसे मामलों में तुरंत सीपीआर और चिकित्सकीय सहायता मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
मोहखेड़ की यह घटना न केवल चिकित्सा दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आपात स्थिति में त्वरित निर्णय और समर्पित सेवा भावना से असंभव दिखने वाली परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है।
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